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सुना है क्या: चुनावी फंड के लिए माननीय ने खुलवाया खाता... मुखिया की सांसें अटकीं, बड़े जिले से पोर्ट हुए अफसर

Thu, 23 Jul 2026 11:20 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

यूपी में चुनाव की तैयारियों के बीच एक माननीय ने फंड इकट्ठा करने के लिए नया खाता खुलवाया और व्यापारियों से फंड लेना शुरू कर दिया है। वहीं, पश्चिम के जिले से एक नौकरशाह राजधानी आए और सभी के आकर्षण का केंद्र बन गए। पढ़ें, रोचक किस्से:
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी में चुनाव की तैयारियों की बीच एक माननीय ने फंड इकट्ठा करने के लिए नया खाता खुलवाया और व्यापारियों से फंड लेना शुरू कर दिया है। वहीं, पश्चिम के जिले से एक नौकरशाह राजधानी आए और सभी के आकर्षण का केंद्र बन गए। वहीं, पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के मुखिया की सांसे अटक गई है। पढ़ें, रोचक किस्से: 

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माननीय का खाता फुल
चुनाव के फंड प्रबंधन को लेकर माननीयों ने व्यवस्था शुरू कर दी है। ऐसे ही एक माननीय हैं, जिन्होंने फंड प्रबंधन के लिए एक दूसरा बैंक खाता खुलवाया है, वह भी किसी दूसरे के नाम पर। शंकर की नगरी से जुड़े माननीय ने अपने ही एक भक्त को फंड प्रबंधन में लगा रखा है। लिहाजा भक्त ने शहर के ही एक व्यापारी से संपर्क साधा कि चुनाव के लिए आपका दान अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। व्यापारी ने खाते का डिटेल मांगा तो भक्त ने कहा खाता फुल हो गया है, दूसरा खाता भेज रहा हूं। अब व्यापारी असमंजस में है कि आखिर कहीं उसका दान किसी दूसरे के खाते में न चला जाए।

यहां भी सभी की नजरें
हाल की तबादला सूची में शामिल एक नौकरशाह पश्चिम के बड़े जिले जिले से राजधानी में पोर्ट हुए हैं। जबरदस्त चर्चा में रहने वाले ये साहब जबसे राजधानी आए हैं, तबसे सभी की निगाहों में चढ़े हैं। उनके क्रियाकलापों पर न केवल शासन के कुछ अफसरों की नजरें हैं बल्कि विभागीय कर्मचारी भी वेट एंड वाच की स्थिति में हैं। दिलचस्प यह है कि वर्तमान तैनाती वाले विभाग के कर्मचारी उनके पूर्व विभाग के कर्मचारियों ने साहब के कारनामों की जानकारी ले रहे हैं।
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मुखिया की अटकीं सांसें
प्रदेश में पढ़ाई-लिखाई वाले एक प्रमुख विभाग के हाल बड़े अजीब हैं। कई साल की लंबी कवायद के बाद एक योजना किसी तरह परवान चढ़ने को हुई तो विभागीय लापरवाही से इसे लेकर काफी किरकिरी हुई। अब उच्चस्तर की कड़ी फटकार के बाद किसी तरह योजना के नियम तो बन गए लेकिन इसे लेकर इतनी किरकिरी हुई है कि शासन की निगाहें भी विभाग के मुखिया पर टेढ़ी हैं। ऐसे में विभाग के मुखिया की सांसें अटकी हैं कि कहीं उन पर विपरीत असर न हो जाए। चर्चा है कि इस पर एक विकेट पहले ही गिर चुका है।
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