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सुना है क्या: छाछ और मलाई निकालने की तरकीब...'बड़े साहब भी कम खिलाड़ी नहीं' के पढ़ें किस्से

Sat, 17 Jan 2026 11:12 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'छाछ और मलाई निकालने की तरकीब' की कहानी। इसके अलावा 'नाम-ध्यान जपना, 30 प्रतिशत अपना' और 'बड़े साहब भी कम खिलाड़ी नहीं ' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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छाछ और मलाई निकालने की तरकीब

सेहत महकमे से जुड़े एक विभाग की मुखिया की सीट बदलने की सुगबुगाहट चल रही है। इसकी भनक उन्हें भी लग गई। फिर क्या था, वह पूरे विभाग को फेंटने में जुट गईं। इसी बीच उनके सिपहसलार ने समझाया कि एक साथ फेंटने से बेहतर होगा कि चरणबद्ध तरीके से फेटा जाए ताकि छाछ, मक्खन और मलाई अलग-अलग निकल आए। ऐसे में फेंटने वाले पत्ते दबा दिए गए हैं। अब देखना यह है कि पहले चरण में कौन-कौन शिकार बनता है। इसे लेकर विभाग में तरह- तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

 

नाम-ध्यान जपना, 30 प्रतिशत अपना

प्रदेश के सबसे अधिक चर्चित जिलों में से एक में इन दिनों गजब का खेल चल रहा है। वहां तैनात एक नौकरशाह अक्सर ही कोई न कोई पवित्र स्थल ढूंढकर खुद को सबसे बड़ा धार्मिक होने का सुबूत पेश कर रहे हैं, दूसरी ओर बच्चों के लिए आने वाले फलों का ही फल चट कर रहे हैं। इस फल की मात्रा 30 प्रतिशत है। वहां के हालत देखकर ऐसा लगता है इस घोर कलियुग में अब भगवान विष्णु को कल्कि अवतार लेना ही पड़ेगा।

 
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बड़े साहब भी कम खिलाड़ी नहीं

एक केंद्रीय विभाग के अफसरों को करोड़ो की घूस लेते एक जांच एजेंसी ने दबोचा तो विभाग के बड़े अफसरों की भी शामत आ गई। दरअसल, एजेंसी के निशाने पर बड़े अफसर भी थे, लेकिन ऐन मौके पर किस्मत ने उनका साथ दे दिया और एजेंसी के पंजे उनकी गर्दन तक नहीं पहुंच सके। अब एजेंसी वाले उनकी पुरानी करतूतों का पता लगा रहे हैं। उनकी हर गतिविधि और बातचीत पर भी पैनी नजर है। शुरुआती जांच में ही कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जो उन्हें आगे सलाखों के दर्शन कराने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं।


 
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