पश्चिम जाते ही भूले अवधी तहजीब
पश्चिम में जबर्दस्त सुर्खियां बटोरने के बाद राजधानी पहुंचे साहब पुरानी रौ में लौटने लगे हैं। शुरुआती दो महीने मिस्टर क्लीन की उपाधि पाने के लिए लबों को सिले बैठे साहब आखिर कब तक चुप रहते। विभाग में जोरों की चर्चा है कि हालिया बैठक में एक अफसर को मामूली गलती पर दुत्कारते हुए न केवल निलंबन की धमकी दी बल्कि उसे श्वान कह डाला। साथ ही टॉप थ्री माननीयों में एक का नाम लेते हुए कहा कि अगर दोबारा उनका फोन आ गया तो छोड़ूंगा नहीं। विभाग में इसकी चर्चा है और उनके आचरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिर मैनेजमेंट की जीत
पश्चिम यूपी के एक जिले के पूर्व कप्तान साहब मारपीट के आरोपों से बरी हो गए हैं। पहले कैमरे पर पीड़ित ने जिस बर्बरता का जिक्र किया था, वह अब कोई कार्रवाई नहीं चाहता है। वैसे भी पुरानी कहावत है कि पुलिस की पिटाई का बुरा नहीं मानना चाहिए। कप्तान साहब ने भी हटते ही कुछ ऐसा प्रबंधन किया जो बाकियों के लिए नसीहत बन गया।
उनके लिए बड़े अफसर भी मैनेजमेंट में जुटे थे। दबाव से लेकर जुगाड़ तक, जो जहां काम आया, आजमाया गया। भला तलवार पर आंच आने का मामला है। खाकी-खाकी का साथ नहीं देगी तो किसका देगी? खैर, इस बार भी मैनेजमेंट की जीत हो गई।
गुस्सा कम करने का विशेष उपाय
प्रदेश के पढ़ाई-लिखाई वाले विभाग के एक साहब अपने गुस्से के लिए जाने जाते हैं। वह किसी भी मुद्दे पर बेबाक तरीके से अपनी बात रखने के लिए भी मशहूर हैं। अभी तक तो उनका यह व्यवहार चल जा रहा था लेकिन कुछ दिनों पूर्व जब से वह एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात हुए हैं, तबसे खुद में बदलाव कर रहे हैं। चर्चा है कि वह गुस्से को कम करने के उपाय कर रहे हैं। उनके ये उपाय काफी चर्चा में हैं।