कैनवास पर जीवंत हुईं हनुमानजी की लीलाएं
लखनऊ। किसी चित्र में हनुमानजी माता सीता से उनके सिंदूर लगाने का कारण पूछ रहे थे तो किसी चित्र में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे। किसी में उनका शांत चिंतन नजर आया तो किसी में उनका बाल स्वरूप दिखा।
हनुमत धाम मंदिर में दो दिवसीय हनुमंत लीला प्रसंग चित्रकला कार्यशाला के समापन अवसर पर कलाकारों ने हनुमानजी के अलग-अलग रूपों और लीलाओं को कैनवास पर बड़े मंगल के अवसर पर इस तरह उतारा कि वे जीवंत लगने लगीं।
संस्कार भारती अवध प्रांत की ओर से आयोजित इस कार्यशाला के समापन पर सभी चित्रों को हनुमत धाम मंदिर प्रबंधन को औपचारिक रूप से भेंट किया गया। हनुमत धाम के मुख्य पुजारी राम सेवक दास, हनुमत धाम ट्रस्ट के न्यासी विजय सिन्हा, पूर्व कुलपति खैरागढ़ विवि पूर्णिमा पांडेय, केंद्रीय ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय सचिव देवेंद्र त्रिपाठी, संस्कार भारती के कार्यकारी अध्यक्ष सीताराम कश्यप ने कलाकारों की साधना को सराहा और उन्हें सम्मानित किया। इनमें विनीत पांडेय, मनोज हंसराज, रश्मि श्रीवास्तव, ईश्वर चंद्र, अश्विनी प्रजापति, सिद्धार्थ देव, सर्वेश पटेल, अमित कुमार और मनोज गोंड शामिल रहे।
इस अवसर पर संस्कार भारती के सह महामंत्री चंद्रभूषण सिंह, राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्रा, संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह वरिष्ठ कलाकार प्रो. सुनील सक्सेना अशोक आदि मौजूद रहे।