प्रसिद्ध कथाकार और पहल पत्रिका के संपादक ज्ञानरंजन की स्मृति में कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभाग
लखनऊ। जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि ज्ञानरंजन सक्रियतावादी लेखक रहे और उनकी भूमिका एक एक्टिविस्ट की थी। वे सठोत्तरी पीढ़ी के अग्रणी कथाकार रहे हैं। उन्होेंने अपनी कहानियों में आजादी के बाद के सामाजिक यथार्थ को आधार बनाया और पारंपरिक कथा लेखन से अलग कहानी को नई भाषा दी।
मौका था प्रसिद्ध कथाकार और पहल पत्रिका के संपादक ज्ञानरंजन की स्मृति में कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का। जनवादी लेखक संघ के महासचिव नलिन रंजन ने कहा कि ज्ञानरंजन हिंदी साहित्य के विशिष्ट कथाकार और सफल संपादक के रूप में हमेशा याद किए जाएंगे। घंटा, बहिर्गमन और पिता जैसी उनकी कहानियों ने उन्हें अमर बनाया।
लक्ष्मीकांत शर्मा ने उनके साथ बिताए 40 साल की यादों को साझा किया। डॉ. अवंतिका सिंह ने कहा कि ज्ञान जी कहते थे कि मशहूर लेखक छोटे शहर से निकलते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रलेस लखनऊ की सचिव इरा श्रीवास्तव ने किया। इप्टा लखनऊ के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव, डॉ. राही मासूम रज़ा एकेडमी से भगवान स्वरूप कटियार, भाकपा से कामरेड परमानंद आदि ने भी अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। इप्टा के प्रांतीय महासचिव शहजाद रिज़वी, मुख़्तार अहमद, गोविंद वर्मा, फरज़ाना मेहंदी, नगीन निशा समेत शहर के साहित्यकर्मी व संस्कृतिकर्मी मौजूद रहे।
प्रसिद्ध कथाकार और पहल पत्रिका के संपादक ज्ञानरंजन की स्मृति में कैसरबाग स्थित बलराज साहनी सभाग