केंद्र ने देश भर में 22 हजार एंबुलेंस दी हैं। यूपी के हिस्से 2960 एंबुलेंस आई हैं, लेकिन यूपी ने नेशनल एंबुलेंस सर्विस का नाम ही बदलकर समाजवादी एंबुलेंस सेवा कर दिया है।
केंद्र की योजनाओं पर प्रदेश सरकार राजनीति कर रही है। केंद्र सरकार ने जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम चलाया।
इसके तहत गर्भवती महिलाएं व उनके नौनिहालों को अस्पताल मुफ्त लाया-ले जाया जाता है।
यदि एंबुलेंस नहीं मिलती है तो टैक्सी से लाने का खर्च भी सरकार देती है।
फैलाई जा रही अफवाह
एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में जिस तरह की अफवाह फैलाई गई थी, उसी तरह की अफवाह इस बार भी फैलाई जा रही है।
फर्क इतना है उस समय नसबंदी मुद्दा था और इस बार कांग्रेस ने 65 वर्षों में कुछ नहीं किया यह झूठ प्रचारित किया जा रहा है।
1977 में भी आरएसएस ने ट्रेनों में जाकर नसबंदी की ऐसी अफवाह फैलाई कि मुस्लिम भाइयों ने भी मुंह मोड़ लिया था।
इस बार उसी तरह की अफवाह ट्रेन के बजाय हवाई जहाज में बैठकर फैलाई जा रही है।
सिर्फ बदनाम होती है केंद्र सरकार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं प्रदेश सरकारें हाईजैक कर रही हैं। पैसा केंद्र देता है और वाहवाही प्रदेश सरकारें लूट रही हैं।
108 व 102 नेशनल एंबुलेंस सेवा केंद्र की हैं, लेकिन गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश ने इनके नाम ही बदल दिए।
केंद्रीय मंत्री गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में यूपीए-एक व यूपीए-दो के शासनकाल में विकास के जितने कार्य हुए हैं, उतने पहले कभी नहीं हुए।
नबी का मानना है कि गलत और झूठा प्रचार कर केंद्र सरकार को बदनाम किया जा रहा है।
यूपी को दिये 15299 करोड़
आजाद के अनुसार पिछले दस सालों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, रक्षा, शिक्षा आदि के क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए काफी काम हुआ है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज इन विकास कार्यों की चर्चा नहीं हो रही है।
आजाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को 10 वर्षों में स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15299 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए हैं। योजना आयोग से मिलने वाले बजट से यह अलग हिस्सा है।
प्रदेश में छह हजार से अधिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने के लिए पैसा दिया गया है। इनमें से साढ़े चार हजार बनकर तैयार हो गए हैं।
प्रदेश में 34800 डॉक्टरों को वेतन भी केंद्र सरकार देती है। 1.36 आशा वर्करों को भी केंद्र सरकार मानदेय देती है।