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ऑनलाइन शॉपिंग पर भी पड़ेगा जीएसटी का असर, कंपनियां चुकाएंगी ज्यादा टैक्स

Fri, 30 Jun 2017 01:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश में 12 फीसदी सर्विस टैक्स और पांच फीसदी एंट्री टैक्स चुकाकर ऑनलाइन माल बेचने वाली कंपनियां भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में आ गई हैं। प्रमुख एक दर्जन कंपनियों में से अधिकतर जीएसटी पोर्टल पर अपना पंजीयन (माइग्रेशन) करा चुकी हैं। अब इन कंपनियों को पहले से अधिक टैक्स चुकाना पड़ेगा। 
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वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एवं मास्टर ट्रेनर (जीएसटी) डॉ. शिव आसरे सिंह के मुताबिक अमेजन, फ्लिपकार्ट, गोआईबीबो, मंत्रा, ग्रोफर्स, जस्ट डायल, नापतौल, होम शॉप-18 सहित कई कंपनियों ने ऑनलाइन माल बेचने के लिए अलग-अलग सेक्टर में वैट के तहत पंजीयन करा रखा था, जो पांच फीसदी एंट्री टैक्स चुकाती हैं। 

एक जुलाई से इन कंपनियों को जीएसटी के तहत जिस वस्तु पर टैक्स का जो रेट तय हुआ है, उसे चुकाना होगा। अब तक 12 फीसदी सर्विस टैक्स और पांच फीसदी एंट्री टैक्स कुल 17 फीसदी टैक्स से काम चल रहा था, लेकिन एक जुलाई से इन कंपनियों को माल की बिक्री पर 28 फीसदी तक जीएसटी भरना पड़ेगा। नई व्यवस्था में वाणिज्य कर विभाग को पहले से अधिक राजस्व हासिल होगा। 
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ऑनलाइन कंपनियों को हर राज्य में कराना होगा पंजीकरण

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जीएसटी की नई व्यवस्था के तहत इन ऑनलाइन कंपनियों को जिस-जिस राज्य में कारोबार करना होगा, वहां पंजीकरण कराना पड़ेगा। वहीं जितने गोदाम एवं कार्यालय बनाएंगी, उसकी जानकारी वाणिज्य कर विभाग को देनी पड़ेगी। जीएसटी में ऑनलाइन कंपनियां जो माल बेचेंगी, उस पर आईटीसी का फायदा भी पाएंगी। 

यूपी में 75 लाख से अधिक टर्नओवर वाले दो लाख व्यापारी
वाणिज्य कर मुख्यालय के एक जॉइंट कमिश्नर ने बताया कि प्रदेश में 75 लाख रुपये से अधिक टर्नओवर वाले करीब दो लाख व्यापारी हैं। इनमें से पांच फीसदी व्यापारियों की सालाना स्क्रूटनी की जाएगी। यानी 10 हजार व्यापारियों की खरीद एवं बिक्री की जांच होगी। 

जीएसटी लागू होने पर बढ़ेगी सचल दल की भूमिका
जीएसटी लागू होने के अग्रिम आदेशों तक वाणिज्य कर अधिकारी न तो व्यापारियों की एसआईबी जांच कर पाएंगे और न ही माल लोडेड ट्रक की चेकिंग कर पाएंगे। हालांकि जांच एवं चेकिंग का आदेश जारी होने के बाद वाहनों की जांच के लिए सचल दल के दस्ते बढ़ाए जाएंगे। दरअसल जीएसटी में सचल दल की अहम भूमिका हो जाएगी।  
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