मछलीशहर लोकसभा सीट का जिक्र आते ही सबसे पहले याद आता है 2019 का चुनाव। तब महज 181 वोटों के अंतर से भाजपा के बीपी सरोज बसपा के त्रिभुवन राम से जीते थे। 2019 में पूरे देश में यह सबसे कम मार्जिन की जीत थी। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट पर भाजपा ने दोबारा बीपी सरोज पर दांव लगाया है। वहीं, सपा और बसपा ने भी सरोज बिरादरी का ही प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। समीकरणों की बिसात ऐसी बिछी है कि इस बार भी यहां कांटे के मुकाबले के आसार हैं।
औद्योगिक क्षेत्र का विकास हो तो बने बात
मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र विकास का मुद्दा अहम है। व्यापारी अजय जायसवाल कहते हैं, यहां औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हो जाए तो इलाके में बेरोजगारी अपने आप दूर हो जाएगी। कुछ ऐसा ही तर्क रमेश सिंह भी देते हैं। वह कहते हैं, मछलीशहर कस्बे में पर्स बनाने का काम घर-घर होता है। इसे नए सिरे से बढा़वा दिया जाए तो हर हाथ को काम मिल सकता है।
दलित वोटरों में सेंधमारी से बदल सकते हैं समीकरण
मछलीशहर में तीनों प्रत्याशी सरोज हैं। इस बिरादरी का वोट करीब एक लाख है। पर, दलितों में गौतम बिरादरी चार लाख के करीब है। खटिक करीब 20 हजार हैं। जिसे गौतम बिरादरी का वोट मिलेगा, वही यहां से सांसद बनेगा।
इस बार के योद्धा
बीपी सरोज, भाजपा : दोबारा मैदान में उतरे बीपी सरोज को भाजपा के परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा है। मोदी-योगी के कामों का सहारा। अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को जोड़े रखने की चुनौती है।
प्रिया सरोज, सपा : पूर्व सांसद और केराकत के विधायक तूफानी सरोज की बेटी हैं। परंपरागत वोटबैंक के साथ ही युवाओं और महिलाओं पर भरोसा है। भितरघात रोकने की चुनौती है।
कृपाशंकर सरोज, बसपा : रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं। मछलीशहर में कई साल से लोगों को संविधान का पाठ पढ़ा रहे हैं। पार्टी के वोटबैंक के साथ शिक्षित समाज को लुभाने में जुटे हैं। अगड़े और पिछड़ों को साधने की चुनौती।