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उजड़ा रहा रामपुर, चमका जया का ग्लैमर

Sun, 16 Mar 2014 01:02 PM IST
कृष्णेंदु कुमार/ अमर उजाला, रामपुर
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स्वतंत्रता संग्राम के वक्त से ही राजनीतिक सुर्खियां बटोरने वाला रामपुर शिक्षा, सेहत, रोजगार व बुनियादी सुविधाओं के मामले में वह मुकाम हासिल नहीं कर पाया, जहां उसे होना चाहिए था।
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आज भी किसी को गंभीर चोट लग जाए या फिर वह बीमार हो जाए तो बरेली या मुरादाबाद की दौड़ लगानी पड़ती है। रोजगार के लिए नौजवानों को रुद्रपुर, हल्द्वानी, काशीपुर, बाजपुर का रुख करना पड़ता है।

किसी वक्त सूबे में कानपुर के बाद रामपुर में सबसे ज्यादा फैक्ट्रियां थीं, लेकिन एक-एक करके सभी बंद होती चली गईं।

कह सकते हैं कि फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा दस साल रामपुर की सांसद रहीं लेकिन वह यहां की तस्वीर बहुत ज्यादा नहीं बदल सकीं।
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हाईवे का काम लटका, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं

सड़कों की बात करें तो एक दो को छोड़कर पूरे जिले में एक भी सड़क सही सलामत नहीं है।

एनएच-24 पर मुरादाबाद से रामपुर के बीच आज भी रोज जाम लगता है। दिल्ली को लखनऊ से जोड़ने वाले इस हाईवे के चौड़ीकरण का काम बरसों से पूरा नहीं हो पाया है।

एनएच-87 की भी यही स्थिति है। यह हाईवे रामपुर से काठगोदाम तक है। रामपुर जिले की 41 किलोमीटर की सीमा में पूरी तरह से हाईवे टूट चुका है।

रामपुर जनपद की इस उपेक्षा के खिलाफ सशक्त आवाज किसी ने नहीं उठाई। गन्ना किसानों के कई करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया है।

जिले में तीन चीनी मिलें है, दो निजी व एक सहकारी। सहकारी क्षेत्र की चीनी मिल से तो भुगतान मिल भी जाता है पर निजी क्षेत्र की मिलों ने तो पिछले साल का बकाया भी नहीं चुकाया है।

इलाज के नाम पर जिला अस्पताल की भव्य बिल्डिंग है। लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। डॉक्टरों के कई-कई पद खाली पड़े हुए हैं। अस्पताल में उपकरण नहीं हैं, दवाएं नहीं हैं।

एक जीत के बाद ही शुरू होने लगे मतभेद

जयाप्रदा 2004 से लगातार इस संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 2004 में आजम खां उनको यहां लेकर आए। रामपुर के लोगों ने उन्हें सिर माथे पर बैठाया, वो चुनाव जीत गईं।

फिर आजम खां से उनके मतभेद शुरू हो गए। 2009 में आजम खां ने उनको सपा का टिकट दिए जाने का विरोध किया, लेकिन उनको टिकट मिला।

आजम खां के विरोध के बाद भी चुनाव जीतीं। इसके बाद बदलते घटनाक्रम में जयाप्रदा व अमर सिंह को सपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

जयाप्रदा पर्व-त्योहार पर रामपुर आती रहीं, लोगों को होली-ईद की बधाई देती रहीं। कुछ महीने पहले तक वो कहती रहीं कि मैं रामपुर छोड़कर नहीं जाऊंगी।

लेकिन रामपुर की सांसद राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गईं और अब वो बिजनौर से चुनाव लड़ेंगी।

दूसरे कार्यकाल ने किया मायूस

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बलबीर सिंह का कहना है कि सांसद जयाप्रदा रामपुर को लेकर गंभीर नहीं रहीं।

शायद उनको पता चल गया था कि रामपुर छोड़ना पड़ सकता है, इसलिए वे जिले के प्रति उदासीन हो गई थीं।

एक सांसद का काम सिर्फ अपनी निधि खर्च कर देना भर नहीं होता है। तमाम समस्याएं होती हैं, जिनको उचित मंच पर उठाना होता है।

ग्रामीण क्षेत्र का विकास करना होता है। जयाप्रदा के दूसरे कार्यकाल ने रामपुर के लोगों को मायूस ही किया है।

समझ से परे सीट छोड़ना

रामपुर के इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चेयरमैन आकाश सक्सेना हनी कहते हैं कि जयाप्रदा जब पहली बार सांसद बनीं थीं तो प्रदेश में सपा की सरकार थी।

उस वक्त उन्होंने विकास के कई कार्य कराए। फिर यूपी में बसपा की सरकार आ गई। सपा की सरकार जब वापस आई तो वो इस पार्टी में नहीं थीं।

सांसद निधि से विकास कराने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने रामपुर छोड़ने का फैसला क्यों किया, यह सवाल समझ से परे है।

भाजपा ने डॉ. नैपाल सिंह को उतारा मैदान में

विधानपरिषद सदस्य व पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. नैपाल सिंह को भाजपा ने मैदान में उतारा है।

कल्याण सिंह के सरकार में वह शिक्षा मंत्री रहे। उनका नाम हालांकि काफी पहले से चर्चा में रहा। शनिवार देर रात नाम पर मुहर लग गई।

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कांग्रेस ने उतारा नवेद मियां को

कांग्रेस ने स्वार-टांडा के विधायक काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को प्रत्याशी घोषित किया है।

नवेद विधानसभा के चार चुनाव व एक उप चुनाव जीत चुके हैं। उनके वालिद जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की पांच बार तो वालिदा बेगम नूरबानो (अब मुरादाबाद की प्रत्याशी) दो बार रामपुर से जीती थीं।

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बसपा से हाजी अकबर हुसैन ठोक रहे ताल

बसपा ने हाजी अकबर हुसैन को मैदान में उतारा है। मुरादाबाद के कुंदरकी से वो कई बार विधायक रहे हैं।

हाजी अकबर पिछली बसपा सरकार में मंत्री थे। 2012 के विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले पार्टी ने उन्हें निकाल दिया था।

2013 में उनको फिर से बसपा में शामिल कर लिया गया। हाजी अकबर भी लोकसभा का चुनाव पहली बार लड़ रहे हैं।

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सपा ने आजम के करीबी नसीर पर जताया भरोसा

सपा ने प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य नसीर अहमद खां को अपना प्रत्याशी बनाया है।

नसीर को प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां का वरदहस्त प्राप्त है। वह भी पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान वो चमरौवा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, जहां मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।

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