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कैराना: कहीं मोदी भारी, तो कहीं चौधरी की आंधी

Tue, 25 Mar 2014 01:56 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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यमुना के किनारे बसे शामली और सहारनपुर जिलों में पडऩे वाली कैराना लोकसभा सीट पर दिलचस्प चुनावी जंग देखने को मिल रही है।
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कैराना सीट में शामली जिले के कैराना, शामली और थाना भवन तो सहारनपुर जिले के गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

बेहद जर्जर सड़कों और गन्ने की शानदार फसल वाला यह इलाका दंगा प्रभावित रहा है। किसी जमाने में जाट-मुसलमान समीकरण के लिए मशहूर रहे इस सीट का चुनावी समर का परिदृश्य थोड़ा उलझा हुआ है।

गन्ना मूल्य भुगतान न होने से किसान परेशान हैं। गड्ढों भरी सड़कों पर चलना दूभर है लेकिन ये सब मुद्दे चुनाव को खास प्रभावित करते नहीं दिख रहे हैं।

नजर नहीं आता सांप्रदायिक ध्रवीकरण

पूरे क्षेत्र में कहीं भी जाइये, लोग बेबाकी से राय रख रहे हैं। बातचीत में कहीं सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नजर नहीं आता।

हालांकि कहीं-कहीं जातीय समीकरण हावी दिखते हैं। चुनावी दंगल के पांचों प्रमुख योद्धा गुर्जर बिरादरी से हैं। दो मुस्लिम और तीन हिंदू गुर्जर।

भाजपा विधानमंडल दल के नेता हुकुम सिंह भाजपा, विधायक करतार सिंह भड़ाना रालोद, नाहिद हसन सपा, कंवर हसन बसपा और सुशील कसाना आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हैं।

पूरे इलाके की बात करें तो कहीं लोग सीधा मुकाबला मानते हैं तो कहीं बहुकोणीय।

यहां मोदी नहीं, चौधरी की लहर

भौरा कलां-शामली मार्ग से दायीं तरफ करीब दो किमी अंदर की तरफ दंगे से प्रभावित रहे प्रमुख गांवों में एक है बहावड़ी।
गठवाला खाप के इस गांव में घुसते ही स्कूल का बड़ा मैदान है। इसमें 20-25 छात्र-नौजवान फुटबॉल खेलते मिलते हैं।

युवा प्रशांत मलिक, अजीत सिंह, अमित, सुमित बताते हैं कि गांव में करीब 150 मुस्लिम परिवार दंगे के बाद पलायन कर गए थे।

गांव के लोगों ने काफी प्रयास किए, लेकिन वे आए नहीं। ब्रह्मचारी ऋषि कहते हैं कि यह राष्ट्रीय लोकदल का क्षेत्र है, यहां सिर्फ नलका (हैंडपंप) चलेगा। अजित सिंह की लहर है।

सभी युवा उनका समर्थन करते हुए रालोद और भाजपा के बीच चुनावी मुकाबला होने का दावा करते हैं। कहते हैं, रालोद को मुस्लिम किसान भी वोट करेगा।

जाट आरक्षण दिखाएगा जादू?

धींवर, कश्यप, गुर्जर और अन्य जातियां भी भड़ाना के साथ हैं। इसी गांव के निवासी और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में कानून के प्रवक्ता मनोज मलिक कहते हैं, क्षेत्र में भाजपा से ज्यादा नाराजगी हुकुम सिंह को लेकर है। उनकी कुछ टिप्पणियों से जाट समाज आहत है।

वह कहते हैं कि जाट आरक्षण के बाद युवा वर्ग रालोद के साथ है। ऐसी ही स्थिति आदमपुर गांव में दिखी। सड़क किनारे चौपाल पर बैठे महेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह भाजपा, रालोद और सपा में तिकोना मुकाबला मानते हैं।

काबड़ौत गांव पर कोल्हू पर गरगागरम शक्कर बना रहे इसी गांव के सूरजपाल सिंह, चरण सिंह, सलेकचंद और राजेंद्र कहते हैं कि मुकाबला भाजपा, बसपा और रालोद के बीच है।
 
कहते हैं, वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है। मोदी की लहर में हुकुम सिंह के चुनाव जीतने की संभावना है। वह पुराने राजनीतिज्ञ हैं, उनकी हर जाति-बिरादरी में पकड़ है।

दंगों से टूटा पुराना समीकरण

शामली में दिल्ली बस स्टैंड के नजदीक शामली गोल्ड ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक सचिन बेबाकी से कहते हैं कि दंगों के बाद जाट-मुस्लिम गठजोड़ टूट चुका है।

अब मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच है। शहरों में वोटों का ध्रुवीकरण है और गांवों में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह का असर। उन्हें हर जाति का वोट मिल रहा है। जाट बिरादरी में भी हुकुम सिंह का असर है।

इस बिरादरी के युवा खासतौर पर मोदी को पसंद कर रहे हैं। बिजनेस के सिलसिले में गुजरात होकर आए सचिन वहां के विकास के मॉडल की तारीफ नहीं करते थकते।

दिल्ली रोड पर ही मिनी गैस सिलेंडर की दुकान पर बैठे अमित संगल, आशु और बॉबी को लगता है कि चुनावी समीकरण अगले कुछ दिनों में साफ होगा। फिलहाल वे भी सपा, भाजपा और रालोद के बीच संघर्ष में भाजपा का पलड़ा भारी मानते हैं।

दंगे पर मरहम का भी असर

मुजफ्फरनगर और शामली के दंगों का असर पूरे क्षेत्र पर है। मिनी गैस सिलेंडर की दुकान चलाने वाले खुर्शीद अहमद कहते हैं कि मुस्लिम वोट अभी बंटा हुआ है।

बसपा और सपा प्रत्याशी चाचा-भतीजे हैं। दंगे से मुस्लिम आहत हुए लेकिन सपा ने मरहम लगाया है। ज्यादातर मुसलमानों का रुझान सपा की तरफ है।

दिल्ली रोड पर हमजा कन्फेक्शनरी के बाहर चुनाव को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। पालिका परिषद के पूर्व मेंबर सलीम अहमद कहते हैं कि इलाके के लोग नाहिद हसन में मुनव्वर हसन का अक्स देखते हैं।

हालांकि बसपा से उनके चाचा कंवर हसन उम्मीदवार हैं लेकिन रुझान सपा की तरफ है। दंगों के बाद सपा ने पीडि़तों की काफी मदद की है। सभी मानते हैं कि चुनाव जाति और धर्म के नाम पर हो रहा है, विकास के मुद्दे पीछे चले गए हैं।

वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद

कैराना में आलकलां में भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह की चौपाल के ठीक बराबर में नदीम और नाजिम की दुकानें हैं। रात में नौ बजे वहां कई लोग चुनावी चर्चा में मशगूल मिलते हैं।

वे मानते हैं कि चुनाव सपा, बसपा और भाजपा के बीच है। वे मुस्लिम वोटों के एकपक्षीय ध्रुवीकरण की संभावना से इन्कार नहीं करते।

कैराना रोड पर मयूर टाकीज के सामने चाय की दुकान पर देर रात तक चुनाव में हार-जीत का गणित लगाया जाता है।

रात में दस बजे चाय की चुस्की पर कांधला देहात के पूर्व प्रधान हाजी अख्तर कहते हैं, चुनाव को लेकर ज्यादा कन्फ्यूजन की स्थिति नहीं है। मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही है। असलम सिद्दीकी, और मोमीन की राय भी उनसे मिलती-जुलती है।
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दिलचस्पी मुजफ्फरनगर सीट को लेकर भी

यूं तो पूरे इलाके में ही सड़कें जर्जर हैं। कांधला से शामली मार्ग पर  ‘अमर उजाला टीम’ आगे बढ़ी तो सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा।

गड्ढों के बीच कई जगह कार बैलगाड़ी की रफ्तार से चली। इस महत्वपूर्ण मार्ग पर रात में वाहनों की आवाजाही नाममात्र की मिली। दो जगह ट्रक खराब खड़े मिले।

नजदीकी मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से लगे गांवों की दिलचस्पी भी कैराना सीट को लेकर है।

भौराकलां गांव में एक चौपाल पर हुक्का गुडग़ुड़ा रहे कई चौधरियों ने कहा, मुजफ्फरनगर में तस्वीर साफ है। यहां वे भाजपा के संजीव बालियान का समर्थन कर रहे हैं लेकिन कैराना में रालोद के करतार भड़ाना के साथ हैं।
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