केस-1 राजधानी लखनऊ के अमौसी प्राथमिक विद्यालय में 100 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक है। शिक्षा मित्रों के सहारे किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।
केस-2 प्राथमिक विद्यालय लोकमान्यगंज में 80 बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां पर शिक्षक नहीं है। शिक्षा मित्रों के सहारे बस काम चलाया जा रहा है।
केस-3 राजकीय इंटर कॉलेज सरोजनी नगर में 1500 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। इनको पढ़ाने के लिए 32 शिक्षक लगे हैं जो मानक से कम हैं।
सिर्फ क्वालिटी एजुकेशन का राग
सरकारी स्कूलों का यह हाल तब है जब निजी स्कूलों से बेहतर पढ़ाई का माहौल बनाने की बात हो रही है। शुक्रवार को शिक्षक दिवस है।
इस मौके पर शिक्षकों को सम्मानित करने के बाद फिर एक बार क्वालिटी एजूकेशन का राग जरूर अलापा गया, फिर भी शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पा रही है।
प्रदेश के प्राइमरी, राजकीय इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेजों में मौजूदा समय 3,06,707 शिक्षकों के पद खाली हैं। यह स्थिति तब है जब सारा ध्यान क्वालिटी एजूकेशन पर है।
प्रदेश की आबादी 20 करोड़ के करीब है। आबादी के आधार पर बच्चों को पढ़ाने के लिए प्राइमरी से लेकर डिग्री स्तर पर 1,62,476 स्कूल और कॉलेज खोले गए हैं।
लगातार गिर रहा है पढ़ाई का स्तर
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह शिक्षकों की कमी और पढ़ाई के स्तर में सुधार न होना है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई में सुधार के लिए सार्थक प्रयास न होने की वजह से ही आज निजी स्कूलों का धंधा फल फूल रहा है। सरकारी स्कूलों में जरूरत के आधार पर शिक्षक नहीं हैं।
सबसे अधिक शिक्षकों की कमी प्राइमरी स्कूलों में है। इसे दूर करने का प्रयास पिछले तीन सालों से चल रहा है, लेकिन अभी तक इसे दूर नहीं किया जा सका है।
कमोबेश यही हाल राजकीय इंटर कॉलेजों से लेकर डिग्री कॉलेजों तक की है। बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी कहते हैं कि प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इस कमी को जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। शिक्षकों की कमी दूर होते ही परिषदीय स्कूलों में गुणवत्तापरक शिक्षा बच्चों को मिलने लगेगी।
ये है यूपी में स्कूलों की फैक्ट फाइल
20 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कुल 1,62,476 स्कूल खोले जा चुके हैं। इनमें कुल 1,13,627 प्राइमरी स्कूल हैं। प्राइमरी में शिक्षकों के कुल पद 4,22,127 हैं।
यहां सिर्फ 1,85,729 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि अब भी 2,36,398 पद खाली हैं।
यहां 45,749 उच्च प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें शिक्षकों के कुल 1,61,597 पद हैं। यहां सिर्फ 1,06,089 शिक्षक पढ़ा रहे हैं, जबकि 55,508 पद अब भी रिक्त हैं।
सूबे में इंटर कॉलेजों की संख्या 1611 है, जबकि राजकीय हाईस्कूल 1021 हैं। इनमें प्रधानाचार्यों के कुल स्वीकृत पद 557 हैं, जिनमें सिर्फ 86 काम कर रहे हैं। यहां अब भी 471 पद खाली पड़े हुए हैं।
इतना ही नहीं, हाईस्कूलों में प्रधानाचार्यों के कुल स्वीकृत पद 1124 हैं, जिनमें 508 खाली हैं और 616 काम कर रहे हैं।
यहां भी शिक्षकों की भारी कमी
कुछ ऐसा ही हाल प्रवक्ता और एलटी ग्रेड के शिक्षकों का भी है। प्रवक्ता के कुल स्वीकृत पद 5334 हैं, जिनमें 4400 शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। यहां 934 पद अब भी खाली पड़े हुए हैं।
एलटी ग्रेड के शिक्षकों की हालत ज्यादा ही खराब है। 14,316 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 5950 पदों पर ही शिक्षकों की नियुक्ति हुई है, जबकि 8366 पद अब भी रिक्त पड़े हुए हैं।
सूबे में राजकीय डिग्री कॉलेजों की संख्या 137 है, तो 331 एडेड डिग्री कॉलेज हैं। इनमें महिलाओं के लिए कुल स्वीकृत पद 3725 हैं, तो पुरुषों के लिए 11,864 पद रखे गए हैं। इनमें भी 3982 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा सकी है।