शादी को यादगार बनाने के लिए दूल्हा कोई कसर नहीं छोड़ता है। यह अमीरी झलकाने और शौक पूरा करने का भी मौका होता है। यही वजह है कि घोड़ी या बग्घी की सवारी के बजाय दूल्हों में अब विंटेज कार पर चढ़कर बरात ले जाने का क्रेज बढ़ा है। इसके लिए किराया भले ही कितना भी देना पड़े।
यूं तो सहालग में बैंड बाजे से लेकर बग्घी वाले, माली, हलवाई, दर्जी सभी की मारामारी रहती है। मगर इस बार बड़ी सहालग में दूल्हों के लिए विंटेज कारों की कमी पड़ गई। किराये पर विंटेज कार देने वालों ने हाथ खड़े कर दिए।
राजधानी लखनऊ में एक सेवा प्रदाता ने बताया कि इन दिनों लग्जरी कारों की अपेक्षा विंटेज कारों की मांग अधिक है। विंटेज कारें शहर में सीमित संख्या में हैं। इसके लिए उनके मालिक मुंहमांगी कीमत ले रहे हैं। गोमती नगर विस्तार के अनुज सक्सेना ने बताया कि उन्होंने एक रात के लिए विंटेज कार पर 55 हजार रुपये खर्च किए।
विंटेज कार (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
पुरानी कारों को सुंदर बनाकर किराये का बढ़ा कारोबार
इंदिरानगर के मोनू पांडेय ने बताया शादियों में विंटेज कारों की मांग बढ़ी है। इस वजह से बहुत से लोगों ने वर्षों पुरानी कारों को सुंदर बनाकर उन्हें किराये पर देने कारोबार भी शुरू किया है। किराये की बात करें तो बीएमडब्ल्यू, जगुआर और ऑडी जैसी लग्जरी कारें 12 घंटे के लिए 25 से 30 हजार में मिल रही हैं, जबकि विंटेज कारें 50 से 60 हजार में।
महंगाई की ये भी वजह
विंटेज कारों का रखरखाव महंगा है। कुछ लोग किराये पर देने से परहेज करते हैं। जिन कारोबारियों के पास हैं, उनमें कमियां हैं। जिन कारों की स्थिति ठीक नहीं है, उन्हें थोड़ी देर के लिए सुंदर और चलने लायक बनाकर किराये पर दिया जा रहा है।
लग्जरी कारों पर एक किलोमीटर पर 80 रुपये
गोमतीनगर के अजय कुमार ने बताया कि वह 10 साल से यही काम कर रहे हैं। उनके यहां डिजायर जैसी सामान्य कारें 10 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से किराये पर दी जाती हैं। लग्जरी कारों पर एक किलोमीटर पर 80 रुपये तक लिए जाते हैं। कार की सजावट और चालक का खर्च अलग से।