ग्राम पंचायतों को और अधिकार देने समेत कई मांगों को लेकर गांधी भवन से मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकाल रहे प्रधानों पर पुलिस ने सोमवार को लाठीचार्ज किया।
इसमें राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई प्रधान घायल हो गए। सरकार के रवैये के विरोध में धरना दे रहे 105 प्रधानों को शाम को गिरफ्तार कर लिया गया।
आक्रोशित प्रधानों ने पंचायतों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बंद करने और लोकसभा चुनाव में सपा का विरोध करने का ऐलान किया है।
ग्राम प्रधानों ने करीब एक साल पहले राजधानी में प्रदर्शन करके सरकार को 40 सूत्रीय ज्ञापन दिया था। इस पर दो बार प्रमुख सचिव पंचायती राज के नेतृत्व में उच्चस्तरीय वार्ता हुई।
21 मांगों पर सहमति बन गई लेकिन कई माहबाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ। सरकार को अपने वादे की याद दिलाने के लिए पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने सोमवार को चेतावनी मार्च का ऐलान किया था। प्रदेश भर से हजारों प्रधान सुबह गांधी भवन पहुंचे।
दोपहर में सवा बारह बजे प्रधानों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र भूषण पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार, बाबूलाल गिरि, डा. देवेन्द्र सिंह सिंधु, श्याम नारायण शुक्ल आदि की अगुवाई में सीएम निवास के लिए पैदल मार्च प्रारंभ किया।
उन्हें रोकने के लिए प्रशासन ने शहीद स्मारक के सामने बैरिकेडिंग कर रखी थी। वहां प्रधानों व पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रधान जैसे ही दूसरी तरफ से आगे बढ़े पुलिस ने लाठियां बरसानी शुरू कर दी और उन्हें दूर तक दौड़ाया।
बल प्रयोग से संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद शर्मा, कानपुर देहात के जिलाध्यक्ष राजेश अग्निहोत्री, शाहजहांपुर के पुष्पेन्द्र चौहान और धीरेन्द्र सिंह यादव, महासचिव अंजली कुमार सिंह, औरैया के राजेश शर्मा, नीरज मिश्रा, डॉ. श्याम नारायण शुक्ल समेत कई प्रधान चोटिल हो गए।
प्रधानों ने बैरिकेडिंग पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। वे इस बात से आक्रोशित थे कि शासन या प्रशासन के किसी जिम्मेदार प्रतिनिधि ने उनसे वार्ता तक नहीं की। शाम को धरना दे रहे प्रधानों को गिरफ्तार कर लिया गया।
नहीं करेंगे मनेरगा का काम, सपा का विरोध करेंगे
राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन ने प्रस्ताव पारित कर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने ऐलान किया है कि 20 दिन में मांगे नहीं मानी गईं तो ग्राम प्रधान मनरेगा और अन्य योजनाओं का काम नहीं करेंगे। लोकसभा चुनाव में सपा का विरोध करेंगे।
कोशिश करेंगे कि सपा को गांवों में कोई वोट न मिले। हजारों प्रधानों के राजधानी में आने के बावजूद शासन-प्रशासन स्तर से किसी जिम्मेदार प्रतिनिधि को बातचीत के लिए नहीं भेजने के लिए भी सरकार की भर्त्सना की गई।
ये हैं प्रमुख मांगे
- 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप 30 विभागों को पंचायतों के नियंत्रण में लाया जाए।
- ग्राम प्रधान को दस हजार रुपये मानदेय दिया जाए।
- प्रधानों को जेल भेजने से पहले उनके विभागाध्यक्ष से अनुमति ली जाए।
- दुर्घटना में प्रधान की मृत्यु पर 10 लाख और बीमारी से मरने पर परिवार को पांच लाख रुपये सहायता दी जाए।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक सचिव उपलब्ध कराया जाए।
- पंचायतों से संबंधित पूर्व के शासनादेशों पर अमल कराया जाए।
- जिला मुख्यालय पर प्रधानों के लिए कार्यालय कक्ष की व्यवस्था की जाए।
- जिला स्तर पर हर माह प्रधानों और अधिकारियों के बीच बैठकेंकराई जाएं।
- ग्राम प्रधानों को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाए।
- जिला योजना में ब्लाक से एक प्रधान सदस्य मनोनीत किया जाए।
- ग्राम प्रधानों को आय, जाति प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया जाए।
- मनरेगा की मजदूरी क्षेत्रीय आधार पर तय की जाए।