राज्य सरकार भले ही राजकीय इंटर कॉलेजों में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने के लिए ग्रेडिंग का सहारा लेना चाहती हो, पर विभागीय अफसरों को यह रास नहीं आ रहा है।
स्थिति यह है कि 34 जिलों में स्कूलों की ग्रेडिंग प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई। माध्यमिक शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने इन जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है।
प्रदेश में सरकारी स्कूलों का स्तर दिनों-दिन गिर रहा है। इसके कारण क्या हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका पता लगाने के लिए स्कूलों की ग्रेडिंग कराने का निर्णय किया गया है। प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेंद्र कुमार इस संबंध में शासनादेश जारी कर चुके हैं।
ग्रेडिंग में स्कूलों में पढ़ाई, सुविधा, छात्र-शिक्षक अनुपात, शैक्षिक सत्र के अनुसार आने वाले रिजल्ट और दाखिले का प्रतिशत क्या है। इसके आधार पर नंबर देते हुए ग्रेडिंग की व्यवस्था की गई है।
विभागीय अफसर नहीं हो रहे तैयार
ग्रेडिंग के आधार पर आकलन किया जा रहा है कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर कैसे सुधरेगा, लेकिन विभागीय अफसर यह प्रक्रिया अपनाने को तैयार नहीं हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को कारण बताओ नोटिस देते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
इन जिलों से मांगा स्पष्टीकरण
अमेठी, रायबरेली, गोंडा, बलरामपुर, बाराबंकी, अलीगढ़, बागपत, बहराइच, बलिया, बांदा, बस्ती, भदोही, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, फतेहपुर, गौतमबुद्धनगर, गाजीपुर, गोरखपुर, कानपुर देहात, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, महराजगंज, मऊ, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, रामपुर, सहारनपुर, संतकबीरनगर, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर, वाराणसी, हापुड़ व शामली।