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UP News: पॉलीटेक्निक में एडमिशन के लिए छात्रों की पहली पसंद सरकारी संस्थान, निजी और अल्पसंख्यक संस्थान पीछे

Tue, 21 Jul 2026 11:21 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

पॉलीटेक्निक में एडमिशन के लिए छात्रों की पहली पसंद सरकारी संस्थान हैं। निजी और अल्पसंख्यक संस्थान पीछे हैं। अल्पसंख्यक संस्थानों में तीन साल से आधी सीटें भी नहीं भर रही हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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Counselling (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार
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यूपी में संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद (पॉलीटेक्निक) की काउंसिलिंग में अल्पसंख्यक पॉलीटेक्निक संस्थान प्रवेश के मामले में प्राइवेट संस्थानों से भी पीछे रह गए हैं। परिषद के आंकड़ों के अनुसार, जहां प्राइवेट पॉलीटेक्निक संस्थानों में अब तक करीब 15 प्रतिशत सीटों पर दाखिले हुए हैं, वहीं अल्पसंख्यक संस्थानों में यह आंकड़ा महज 10 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। स्थिति यह है कि 3,820 सीटों के मुकाबले अब तक केवल 570 छात्रों ने प्रवेश लिया है।

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राजधानी लखनऊ समेत प्रदेशभर के 455 पॉलीटेक्निक संस्थानों में डिप्लोमा इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की 1.45 लाख सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है। इनमें 149 राजकीय, 18 सहायता प्राप्त (एडेड), 58 पीपीपी मॉडल, 210 प्राइवेट और 13 अल्पसंख्यक पॉलीटेक्निक संस्थान शामिल हैं। परिषद के आंकड़ों के अनुसार, 38,887 सीटों वाले राजकीय संस्थानों में करीब 34 हजार प्रवेश हो चुके हैं। दूसरी ओर, प्राइवेट संस्थानों की 85 हजार सीटों के मुकाबले 10,844 दाखिले हुए हैं।

अल्पसंख्यक संस्थानों में कम प्रवेश

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि काउंसिलिंग में शामिल अधिकांश योग्य अभ्यर्थियों की पहली पसंद राजकीय संस्थान रहे हैं। इसके बाद एडेड संस्थानों को प्राथमिकता दी है। प्राइवेट संस्थानों की तुलना में अल्पसंख्यक संस्थानों में कम प्रवेश हुए हैं। तीसरे और चौथे चरण की काउंसिलिंग तक शत-प्रतिशत सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

तीन साल से आधी सीटें भी नहीं भर रहीं

प्रदेश के 13 अल्पसंख्यक पॉलीटेक्निक संस्थानों में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और वोकेशनल डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 70 से 75 नियमित सीटें हैं लेकिन पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों में 50 प्रतिशत सीटों पर भी प्रवेश नहीं हो सके। 

वहीं, प्राविधिक शिक्षा परिषद के आंकड़ों के अनुसार, निजी संस्थानों में संचालित डिप्लोमा इंजीनियरिंग की 82 से 89 हजार सीटों के सापेक्ष केवल 35 से 38 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाते हैं। सत्र 2023-24 में 35 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश हुए, सत्र 2024-25 में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत रहा। सत्र 2025-26 में 38 प्रतिशत सीटों पर दाखिले हुए।
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संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौती

एडेड पॉलीटेक्निक की तर्ज पर प्रवेश प्रक्रिया होने के बावजूद आधुनिक प्रयोगशालाओं, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और अपेक्षाकृत अधिक शुल्क को अल्पसंख्यक संस्थानों में कम प्रवेश की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

डाटा साइंस और ऑटोमोबाइल में सबसे कम रुझान

इन संस्थानों में कंप्यूटर, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल इंजीनियरिंग जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रवेश हो रहे हैं, जबकि डाटा साइंस और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग जैसे नए पाठ्यक्रमों में छात्रों का रुझान सबसे कम दर्ज किया गया है।
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