राज्यपाल राम नाईक का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से तो जुड़े हैं लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी में नहीं है। राज्यपाल का पद स्वीकार करते ही उन्होंने भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। वह पद की गरिमा समझते हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में वह नहीं पड़ना चाहते।
उन्होंने अपवाद स्वरूप तय किया है कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खां के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। सरकार के कामकाज को लेकर उनका कहना है कि सरकार जो काम या प्रयास कर रही है उससे वह तो संतुष्ट हैं। लोग संतुष्ट हैं या नहीं, यह उन्हें देखना है।
बतौर राज्यपाल एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर बुधवार को राजभवन में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब में नाईक ने यह बातें कही। यह पूछने पर कि आजम खां ने तो आपसे जान का खतरा तक होने और आरएसएस के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है?
नाईक ने कहा, उन्होंने तय किया है कि वह आजम के बारे में कोई वक्तव्य नहीं देंगे। बोले- ‘हां आरएसएस का तो हूं पर अब बीजेपी में नहीं हूं। राज्यपाल पद की गरिमा समझता हूं। संविधान के अनुसार काम करने की शपथ ली है और वह कर रहा हूं।’ क्या अपनी सरकार से संतुष्ट हैं?
नाईक ने कहा, सरकार के साथ काम कर रहा हूं। मेरी सरकार है ऐसा मानते हुए जिन बातों में सुधार होना चाहिए चाहे वह कानून-व्यवस्था का सवाल हो या बिजली का अथवा कोई और, जब उन्हें लगता है तो वह सरकार को सलाह देते हैं और वह मानती भी है। सलाह पर कार्यान्वयन कितना होता है वह हम भी देखते हैं और आप भी। फिलहाल सरकार जो प्रयास कर रही है उससे संतुष्ट हूं।
भर्तियों में एक जाति के प्रभाव की जानकारी लूंगा
लोकायुक्त की चयन प्रक्रिया में बदलाव के सरकार के फैसले के बारे में पूछने पर नाईक ने कहा, उन्हें कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किए गए निर्णय की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। जब तक अधिकृत जानकारी न मिल जाए तब तक वह इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं व पुलिस में जाति विशेष के लोगों की भर्तियों के सवाल पर कहा, अखबारों से ऐसा पढ़ा है। इसे लेकर अक्सर चर्चा होती है और पढ़ता-सुनता रहता हूं। जानकारी भी लेता हूं। सरकार से भी इसकी जानकारी लूंगा।
लोकायुक्त चयन पर नहीं मिला सीएम व नेता प्रतिपक्ष का जवाब
नाईक ने कहा कि नए लोकायुक्त के चयन में विलंब पर उन्होंने चयन प्रक्रिया से जुड़े मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष व इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था।
मुख्य न्यायाधीश ने तो जवाब भेजा है लेकिन मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष की ओर से कोई जवाब नहीं आया। यही नहीं, लोकायुक्त की 24 विशेष रिपोर्टों में से 20 पर कार्रवाई न करने के बारे में भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया। उन्हें लगता है कि लोकायुक्त की रिपोर्टों पर कार्रवाई न करके सरकार सुशासन (गुड गवर्नेंस) की अनदेखी कर रही है। इसकी उन्हें पीड़ा है।
अध्यादेशों व विधेयकों का संवैधानिक परीक्षण
राज्यपाल ने बताया कि अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने, ग्रेटर नोएडा चिकित्सा विश्वविद्यालय से संबंधित अध्यादेश तथा स्थानीय निकायों के अधिकारों में कटौती करने तथा सैफई चिकित्सा विवि से संबंधित विधेयकों का संवैधानिक दृष्टि से अभी परीक्षण कराया जा रहा है। जबकि केंद्रीय कानूनों से संबंधित तीन विधेयकों गुंडा एक्ट, गिरोहबंद कानून में संशोधन और निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े विधेयक को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
एमएलसी मामले पर सरकार के जवाब का इंतजार
राज्यपाल ने कहा कि विधान परिषद में नामित होने वाले सदस्यों के बारे में पहली बार परंपरा से हटकर संविधान की भावना के आधार पर निर्णय की पहल की है। सरकार ने नौ नाम भेजे थे जिनमें से चार ही संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पाए गए जिन्हें मंजूरी दे दी गई है। शेष पांच के बारे में सरकार से और जानकारियां मांगी है। सूचनाएं मिलने के बाद इसका परीक्षण करूंगा।
एक साल के कामकाज पर पुस्तिका का लोकार्पण
राज्यपाल के रूप में एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर नाईक ने ‘राजभवन में राम नाईक 2014-15’ शीर्षक से एक पुस्तिका प्रकाशित कराई है। उन्होंने बुधवार को इस पुस्तिका का लोकार्पण किया। इसमें नाईक के एक वर्ष के कामकाज का पूरा ब्यौरा दर्ज है।