राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि जिस प्रकार अमेरिका ने भारत पर अनेक प्रकार के टैरिफ प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत झुका नहीं और दृढ़ता से आगे बढ़ता रहा। यह 140 करोड़ जनता की ताकत का प्रमाण है। उसी प्रकार विश्वविद्यालयों को भी निरंतर आगे बढ़ते रहना है।
वे रविवार को राजभवन में एनआईआरएफ में प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा प्राप्त अच्छी रैंकिंग को लेकर संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और हर क्षेत्र में नवाचार नई संभावनाएँ खोल रहा है। विश्वविद्यालयों को उपलब्ध संसाधनों का आपसी सहयोग से प्रयोग कर निरंतर आगे बढ़ना होगा। इस शैक्षणिक यात्रा को रुकने नहीं देना है, बल्कि प्रगति के नए शिखर छूते रहना है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजभवन में 22 बच्चों को बांसुरी वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें 26 जनवरी की परेड में प्रस्तुति के लिए तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार विश्वविद्यालयों को भी कौशल और नवाचार की दिशा में नए प्रयोग करने चाहिए। राजभवन में मॉडल विद्यालय बनाया जा रहा है। राजभवन के अधिकारी और कर्मचारियों ने अभियान चलाकर आसपास की बस्तियों से 75 नए बच्चों का नामांकन कराया और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल जी ने निर्देश दिया कि हर विश्वविद्यालय में कम-से-कम पाँच विभागों के बीच आंतरिक प्रतियोगिताएँ आयोजित हों। इनमें जो सर्वोत्तम कौशल और नवाचार सामने आए, उसे आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को उनसे संबंद्ध महाविद्यालयों को नैक रैंकिंग प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालयों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर अच्छे कार्य में समस्याएँ आती हैं, लेकिन समाधान खोजकर ही आगे बढ़ना होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को जो रैंकिंग मिली है, उसकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने भी की है। प्रधानमंत्री की इसमें रुचि है कि देश के विश्वविद्यालय आगे बढ़ें और यह देखकर प्रसन्नता होती है कि प्रदेश के विश्वविद्यालय प्रगति की ओर अग्रसर हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को पहचानकर उन पर कार्य करें, सुधार लाएँ और आगामी वर्षों में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करें। इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी शिक्षा डॉ. पंकज एल जानी ने कहा कि लैब से लैंड और लैंड से लैब की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने सीमित संसाधनों के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धि पाई हैं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, शिक्षक आदि उपस्थित थे।