यूपी विधानसभा के निवर्तमान विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा रामगोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
इस मामले में माता प्रसाद पांडेय की ओर से दी गई दलील को खारिज करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा है कि दो गलत निर्णय मिलकर भी एक उचित निर्णय नहीं हो सकते हैं।
राज्यपाल ने बृहस्पतिवार को विधानसभा को भारत के संविधान के अनुच्छेद 175 (2) के तहत दुबारा संदेश भेजा है। इसमें राज्यपाल ने कहा है कि माता प्रसाद पांडेय द्वारा रामगोविंद चौधरी को नेता विरोधी दल के रूप में मान्यता दिए जाने के संबंध में 28 मार्च को भेजे गए उनके संदेश के साथ इस संदेश पर भी विधानसभा उचित समय पर विचार करे।
गौरतलब है कि राज्यपाल द्वारा विधानसभा के विचारार्थ भेजे गए संदेश पर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मीडिया के जरिए स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि विगत दो दशकों के दौरान विधानसभा में नेता विरोधी दल को निवर्तमान अध्यक्ष द्वारा ही मान्यता दी जाती रही है। माता प्रसाद ने अपने निर्णय को परंपरागत नियमानुकूल एवं निवर्तमान अध्यक्ष को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अधीन बताया।