‘सुशासन का अर्थ यही है कि प्रदेश में अच्छा शासन स्थापित हो। अब कौन खराब है, कौन अच्छा है, यह देखने और तय करने का निर्णय सरकार को करना है। अगर कभी सरकार समय पर निर्णय नहीं करती है तो जनता उचित समय पर निर्णय करेगी।’
प्रदेश सरकार को सुशासन पर नसीहत देते हुए यूपी के प्रथम नागरिक राज्यपाल राम नाईक ने यह बात कही। सुशासन दिवस के मौके पर गुरुवार को राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारत सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदनमोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा को दूध में शक्कर और केसर मिलने सरीखा बताया।
प्रदेश के नागरिकों के लिए क्रिसमस और नव वर्ष की शुभेच्छाएं जाहिर करते हुए राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि नया वर्ष नागरिकों को और क्रियाशील बनाएगा।
सुशासन दिवस पर पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी व मालवीय को भारत रत्न की घोषणा के लिए उन्होंने पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का आभार जताया। साथ ही कहा कि भले ही इस कदम में देरी हुई, लेकिन इससे वाजपेयी और मालवीय से ज्यादा सम्मान, सम्मान का हुआ है।
मालवीय जी ने किया ये सबसे बड़ा काम
अंग्रेजों के समय में काशी हिंदू विद्यापीठ की स्थापना को उन्होंने मालवीय का सबसे बड़ा योगदान बताया। उन्होंने कहा कि आज प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ज्ञान व शिक्षा देने की प्रक्रिया को एक व्यापार बना चुकी हैं, मालवीय ने बेहद अनोखा काम किया।
हिंदुत्व के धुर विरोधी हैदराबाद के निजाम तक से उन्होंने विद्यापीठ के लिए चंदा हासिल किया जो अपना उद्देश्य किसी भी हालत में पूरा करने का अनूठा उदाहरण है। वाजपेयी के लिए राज्यपाल ने कहा कि लखनऊ और यहां के जीवन में वे किस तरह रचे-बसे थे, यह जग जाहिर है।
अच्छी लस्सी-चाट कहां मिलती है, वाजपेयी जानते हैं
नाईक ने बताया कि एक दिन पहले ही लालजी टंडन ने वाजपेयी के साथ लखनऊ में सबसे अच्छी लस्सी और चाट खाने अनुभव बताए और कहा था कि वाजपेयी और लखनऊ के इस रिश्ते को सिर्फ वही जानते हैं।
नाईक ने अपने अनुभव बताए कि यूएनओ में कश्मीर पर भारत का पक्ष रखने के लिए जब शिष्ट मंडल बनाया गया तो उसका नेतृत्व तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने वाजपेयी को सौंपा। सत्ता और विपक्ष के संबध कैसे होने चाहिए, यह उसका श्रेष्ठ उदाहरण है।
शहीदों के परिवारों को पेट्रोलपंप दिलाना शुरू किया
नाईक ने बताया कि जब वे पेट्रोलियम मंत्री थे, देश को कारगिल युद्ध लड़ना पड़ा। इससे पहले तक शहीदों का अंतिम संस्कार युद्ध स्थल में ही कर दिया जाता था।
वाजपेयी ने निर्णय किया शहीदों का दाह उनके ही गांव में होगा, इससे जनता में देशभक्ति का जज्बा बढ़ाने में जबरदस्त मदद मिली। दूसरी ओर शहीदों के परिवारों को आजीविका का साधन मिले, इसके लिए नाईक ने पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसी देने का सुझाव रखा, वाजपेयी ने इसे तुरंत सहमति दे दी।
सुशासन कायम करना बड़ी जिम्मेदारी
प्रदेश में सुशासन स्थापित करने को लेकर नाईक ने कहा कि इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों व कार्यालयों को उदाहरण बनने वाले काम करने होंगे।
यह जरूरी है कि शीघ्र और सही कार्यवाही की जाए ताकि नागरिकों को सुशासन में रहने का अहसास हो। प्रशासक के तौर पर नाईक ने अपने अनुभव बताए और कहा कि सांसद नहीं रहने पर भाजपा ने उन्हें पार्टी में अनुशासन कायम रखने का दायित्व सौंपा।
इस दौरान उमा भारती और मदनलाल खुराना को उनके वक्तव्यों की वजह से बाहर निकालना पड़ा।
वीडियो में देखें क्या बोले गर्वनर