राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि सांसद और विधायक निधि से होने वाले कामों में 10-15 प्रतिशत तक भ्रष्टाचार है। उन्होंने सरकारी मुलाजिमों को राजनीति से दूर रहकर अपना काम करने की सलाह दी। इसके अलावा रेलवे मंत्री के रूप में नीतीश कुमार के कामकाज की तारीफ भी की।
राज्यपाल बुधवार को लखनऊ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की ओर से यूपी प्रेस क्लब में आयोजित ‘मीडिया से संवाद’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। उनसे पहले इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष के. विक्रम राव ने कहा कि मुंबई में हिंदी के पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं।
राज्यपाल राम नाईक ने अपने संबोधन की शुरुआत इसी सवाल से करते हुए कहा कि मुंबई में न सिर्फ पत्रकार बल्कि हर अच्छा उत्तर भारतीय पूरी तरह से सुरक्षित है।
अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में विशेष महिला ट्रेन उन्हीं की देन है। तब वे रेल राज्यमंत्री थे और नीतीश कुमार रेल मंत्री। उस वक्त नीतीश कुमार ने काफी अच्छा काम किया था।
यूपी के लोग यहीं काम करें तो बदल जाएं हालात
एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि सांसद और विधायक निधि का 10-15 प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, फिर भी अन्य योजनाओं को देखते हुए इसमें भ्रष्टाचार काफी कम है।
लखनऊ की शान ‘कन्वेंशन सेंटर’ सरीखे निर्माण भी इसी निधि से हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोग जितना काम मुंबई में जाकर करते हैं, अगर उतना ही काम यहां करें तो प्रदेश का काफी विकास हो सकता है।
राजभवन के गेट पर लगी दो तोपों को औपनिवेशिक काल की निशानी मानने से इन्कार करते हुए उन्होंने इन्हें संघर्ष का प्रतीक बताया। साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के कामकाज समेत कई मुद्दों पर जवाब देने से मना भी कर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी ने कहा कि अब हर महीने प्रेस क्लब में ‘मीडिया से संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने राज्यपाल को 16 अप्रैल को उनके जन्मदिन के लिए बधाई भी दी।
कार्यक्रम में मुंबई से आए वरिष्ठ पत्रकार प्रेम शुक्ला, रामकिशोर त्रिवेदी और ब्रजमोहन पांडेय को सम्मानित किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार हसीब सिद्दीकी, सिद्धार्थ कलहंस प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
मेट्रो के काम में कोई अड़चन नहीं
राज्यपाल ने कहा कि लखनऊ में मेट्रो रेल का काम ठीक चल रहा है। मुख्यमंत्री और मेट्रो प्रोजेक्ट के एमडी से उनकी हाल ही बात हुई है। कहीं कोई दिक्कत नहीं है। अगर इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के बीच कोई कठिनाई है, तो उसे दूर किया जाएगा।
लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुरी करने का मुद्दा उठा
राज्यपाल ने कहा कि उनके प्रयासों से ही बंबई का नाम मुंबई हुआ। इस पर उनके सामने लखनऊ का नाम लक्ष्मणपुरी करने की मांग भी रखी गई। इस पर राज्यपाल ने कहा कि यह मांग पत्रकार संगठन की ओर से उठनी चाहिए। अब उनकी भूमिका सिर्फ राज्य और केंद्र के बीच सेतु की है।
पत्रकारों पर फर्जी केस पर मांगा लिखित आवेदन
राजधानी पुलिस द्वारा पत्रकारों पर डकैती का फर्जी केस लगाने का मुद्दा भी राज्यपाल के सामने उठा। पत्रकारों ने कहा कि खबरों से चिढ़कर लखनऊ के पुलिस कप्तान ने उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाया है। इस पर राज्यपाल ने कहा कि इसकी लिखित अर्जी दी जाए। न्यायोचित कार्रवाई कराई जाएगी।