डॉ. नैय्यर मसूद
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उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के फारसी के पूर्व विभागाध्यक्ष पद्मश्री डॉ. नैय्यर मसूद का सोमवार को निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और काफी दिनों से बीमार थे।
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उनके निधन पर दुःख व्यक्त किया और दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए दुःखी परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उनके परिवार में विधवा, एक बेटा एवं तीन बेटियां एवं दो छोटे भाई हैं।
1936 में लखनऊ में जन्में नैय्यर मसूद ने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक और फिर फारसी में परास्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके पिता सैयद मसूद हसन रिजवी अदीब भी लखनऊ विश्वविद्यालय में फारसी के प्रोफेसर थे। नैय्यर मसूद ने इलाहाबाद से फारसी और लखनऊ विश्वविद्यालय से उर्दू में पीएचडी हासिल की। उनकी पुस्तक ताऊस चमन की मैना काफी चर्चित है।
उन्होंने 21 पुस्तकें लिखीं, जिनका विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ। उनकी रचनाएं पाकिस्तान में भी प्रकाशित हुईं। पद्मश्री, साहित्य अकादमी, सरस्वती सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान, पुरस्कार से वे सम्मानित हुए। 16 नवंबर 1996 को लखनऊ विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त होने के बाद वह प्राय: लेखन में ही व्यस्त रहे। पिछले एक दशक से वह काफी बीमार चल रहे थे।
वरिष्ठ उर्दू आलोचक शारिब रुदौलवी ने कहा कि मेरा उनका करीब 63 साल का साथ था। साहित्यकार शकील सिद्दीकी ने कहा कि नैय्यर मसूद के निधन से एक युग का अंत हो गया। उनके निधन से अदब एवं रिवायतों का एक दौर खत्म हो गया।