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सरकार के कामकाज का मूल्यांकन राज्यपाल नहीं, जनता करती है : रामनाईक

Mon, 15 Jul 2019 10:42 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राज्यपाल राम नाईक - फोटो : amar ujala
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अपने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रहे राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि सरकार के कामकाज का मूल्यांकन जनता करती है। जिस तरह से दो बच्चों के काम की तुलना नहीं की जा सकती, उसी तरह से वे अपने कार्यकाल में रहीं अखिलेश और योगी सरकार के कामकाज की तुलना नहीं कर सकते। इतना जरूर कहेंगे कि अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ, दोनों के ही साथ उनके बेहतर रिश्ते रहे।

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रामनाईक ने राजभवन में सोमवार को अपना पंचम कार्यवृत्त जारी किया। इस अवसर पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, दो मुख्यमंत्रियों अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ की सरकार के साथ मैंने काम किया। दोनों से ही मेरे व्यक्तिगत रिश्ते अच्छे थे और आज भी अच्छे हैं। कहा कि दोनों के कामकाज का परीक्षण नहीं कर सकता, क्योंकि यह कार्य जनता का है।

यह पूछे जाने पर कि दोनों सरकारों के किस काम से आप ज्यादा प्रभावित रहे, रामनाईक ने कहा कि कुष्ठ रोगियों के कल्याण के लिए उन्होंने सुझाव दिए थे, जिसे दोनों ने माना। अखिलेश यादव की सरकार ने कुष्ठ रोगियों की पेंशन 300 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिमाह की।

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योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कुष्ठ रोगियों को सरकारी आवास देने के उनके सुझाव को स्वीकार किया। सीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत 3791 कुष्ठ पीड़ितों को चिह्नित कर उन्हें 46 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आवास दिए जाएंगे।

राज्यपाल ने कहा कि उनका कार्यकाल 22 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। लेकिन, नियमानुसार नए राज्यपाल की व्यवस्था होने तक वे पद पर बने रहेंगे। योगी सरकार के कार्यकाल में राजभवन तक कम अर्जियां आने के सवाल पर रामनाईक ने कहा कि हो सकता है कि लोगों की समस्याओं का समय रहते समाधान हो गया हो।

नतीजतन, पहले के मुकाबले कम अर्जियां आईं। इस मौके पर उन्होंने अपनी सफलता के पीछे पत्नी और दोनों बेटियों के योगदान को सराहा। राजभवन में उनके कामों के प्रचार-प्रसार के लिए सूचना विभाग के अधिकारी अंजुम नकवी की भी प्रशंसा की।

यूपी सर्वोत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर

रामनाईक ने कहा कि उनके कार्यकाल में यूपी सर्वोत्तम प्रदेश बनने की ओर अग्रसर हुआ। इसमें उनका भी थोड़ा-बहुत योगदान है। राज्यपाल ने कहा कि पांच साल के कार्यकाल में कुल 2 लाख 19 हजार 643 आवेदन पत्र आए थे। इनके समाधान के लिए उन्होंने पूरा प्रयास किया। 

राज्यपाल ने अपने पांच साल के क्रियाकलापों का तुलनात्मक विवरण भी जारी किया। पांच वर्षों में विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुल 119 दीक्षांत समारोह हुए। 26 विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में उपस्थित रहे। उपाधियां अर्जित करने वालों में छात्राओं की संख्या 56 प्रतिशत और पदक पाने वालों में छात्राओं की संख्या 66 प्रतिशत रही।

पांच साल में मात्र 22 दिन की छुट्टी पर रहे राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2017-18 और 2016-17 में कोई अवकाश नहीं लिया। पांच साल में नियमानुसार 100 दिन का अवकाश ले सकते थे, पर मात्र 22 दिन का ही अवकाश लिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने ‘एप्रोच टू एग्रीकल्चर : ए होलिस्टिक ओवरव्यू’ पर सुझाव देने के लिए उनकी अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इसके तहत किसानों की आय दोगुना करने के बारे में सुझाव दिए।
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पहल पर शुरू हुए कई काम

राज्यपाल ने कहा कि यूपी दिवस मनाने की शुरुआत उनकी पहल पर हुई। वाराणसी, आगरा, मेरठ और लखनऊ में उन्होंने गीत रामायण का आयोजन कराया। ब्रेल लिपि के अलावा जर्मन समेत विभिन्न भाषाओं में उनकी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!’ के संस्करण आ चुके हैं।

बचत के लिहाज से वोट देने नहीं गए मुंबई
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक मतदान वाले केद्रों से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को उन्होंने सम्मानित करने की घोषणा की है। चुनाव आयोग से इस बाबत सूचना मिलने पर वे इस कार्य को अंजाम देंगे। राज्यपाल ने कहा कि मितव्ययिता की दृष्टि से वे और उनकी पत्नी लोकसभा चुनाव में मत देने मुंबई नहीं गए, बल्कि पोस्टल बैलट से मतदान किया। इससे 1.27 लाख रुपये की बचत और जेड प्लस सुरक्षा में तैनात रक्षकों पर होने वाला व्यय बचा।

कल होगा राजभवन में विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण
राज्यपाल ने कहा कि उनके प्रयासों से राजभवन में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा लगी। इसका अनावरण 17 जुलाई को होगा। केंद्रीय बजट में मत्स्य संवर्धन मंत्रालय के गठन की घोषणा की गई, जिसकी मांग वे लंबे समय से कर रहे थे।
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