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संस्कृत मां है, इसकी तुलना बहु या बेटे से नहीं हो सकती : योगी

Wed, 07 Feb 2018 03:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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उत्कृष्ट कार्य के सम्मानित करते राज्यपाल। - फोटो : amar ujala
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संस्कृत संस्थान की ओर से बुधवार को लोक भवन में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यपाल रामनाईक और सीएम योगी आदित्यनाथ ने संस्कृत संस्थान के साधकों को सम्मानित किया। इस मौके पर सीएम ने संस्कृत को मां का दर्जा देते हुए कहा कि इसे विश्वभाषा की माता का गौरव दिलाने के लिए सभी आगे आएं।

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इस मौके पर राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि संस्कृत को राज भवन से लोक भवन लाने की जरूरत है। हम संस्कृत की ओर नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा। विदेश से कोई उत्थान के लिए नहीं आएगा। राज्यपाल ने कहा कि जब यूनेस्को ने कहा तब कुछ लोगों को कुम्भ खास लगने लगा। यूपी में कुछ होता है तो देश में होता है। यूपी में कुछ नहीं हुआ तो देश में कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि संस्कृत में सूत्र में कहने की अद्भुत क्षमता है। सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य है 'यतो धर्मो ततो जय:'। यहां लोगों को धर्म की परिभाषा ही नहीं पता है। अब कुछ लोग कह सकते हैं कि सुप्रीम कोर्ट भी अब सेक्युलर नहीं रहा जबकि धर्म का अर्थ 'रूल ऑफ लॉ' होता है। उन्होंने बताया कि जल्द ही राष्ट्रपति मेरी पुस्तक 'चरैवेति चरैवेति' के संस्कृत अनुवाद का लोकार्पण काशी में करेंगे।

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संस्कृत के विद्वान और छात्र आगे आएं, हम करेंगे सहयोग

- फोटो : amar ujala
सीएम योगी ने कहा कि दो वर्षों के संस्कृत संस्थान के पुरस्कार एक साथ साधकों को दिए जा रहे हैं। मुझे आश्चर्य होता है कि संस्कृत की तुलना कुछ बोली या भाषा से करने लगते हैं। आज की भौतिकता के युग मे संस्कृत की पहचान बनी है तो संस्कृत के विद्वानों और श्रुति परंपरा के कारण। लेकिन, संस्कृत की दुर्गति के लिए भी संस्कृत से जुड़े लोग ही जिमेददार हैं।

सीएम ने कहा कि संस्कृत विद्यालय की मान्यता लोग ले लेते हैं लेकिन न वहां शिक्षक पढ़ाने जाते हैं और न ही छात्र पढ़ने जाते हैं। इसीलिए प्रतिस्पर्धा में बहुत पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के गठन में 17 वर्ष लग गए। वह भी तब जब मैंने हर महीने मॉनिटरिंग की। हालांकि, अभी भी यह ठीक से काम करेंगे इसमें संशय है।

योगी ने कहा कि मैंने संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष से कहा कि क्या अवकाश के दिनों में हम विद्यालयों में संस्कृत संभाषण के कैम्प नहीं लगा सकते। जब अर्वाचीन और प्राचीन मिलेगा तब ही विकास होगा।

यह भाषण और नारेबाजी से नहीं होगा। इसके लिए समाज के समक्ष योग्यता कि कसौटी प्रस्तुत करनी होगी। योग्य विद्वानों को आगे लाना होगा। संस्कृत के विद्वानों और छात्रों को यह नेतृत्व करना होगा। योगी ने भरोसा दिलाया कि सरकार इसमें सहयोग करेगी।

बाकी भाषा इस लोक की और संस्कृत परलोक की

- फोटो : amar ujala
आदित्यनाथ ने कहा कि बाकी भाषा इस लोक की है और संस्कृत परलोक की भाषा है। वहां का संवाद संस्कृत में ही होगा। जहां विज्ञान की सीमा समाप्त होती है वहां आध्यात्म प्रारम्भ होता है।

संस्कृत के विद्वान अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाते हैं। जब आप भी अपने बच्चे को संस्कृत नहीं पढ़ाएंगे तो दूसरे से कैसे अपेक्षा करेंगे। अपने अंदर की हीन भावना को छोड़ना होगा। हमने पिछले 150-200 वर्षों से कुछ नया सोचना और करना बंद कर दिया है।

योगी ने कहा कि जो यूरोप करता है, हम उसे अपने माथे पर बांध लेते हैं। आखिर वह बासी ज्ञान ही तो बांट रहे हैं। हम बृहस्पति का विमानन शास्त्र क्यों भूल गए? आधुनिक वैज्ञानिकों के साथ बैठ कर क्यों नहीं इस पर चर्चा करते हैं। हम शुश्रुत को क्यों भूल गए।
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ऐसा माहौल बनाएं कि हर स्कूल में हो संस्कृत संभाषण

- फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा कि गणेश और दक्ष की कथा बताती है कि हमारी शल्य चिकित्सा कितनी आगे थी। आज भी हम ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए ब्लड ग्रुप मिलाते हैं जबकि तब जानवरों के सिर जोड़ दिए गए थे। चीन आज इस पर शोध कर रहा है।

सीएम ने कहा कि हमारी योजना है कि प्रदेश के सभी विद्यालयों में चाहे वह किसी बोर्ड या माध्यम का हो वहां सामान्य संस्कृत संभाषण हो सके, ऐसा माहौल बनाइए। उन्होंने कहा कि संस्कृत मां है, इसकी तुलना बहु या बेटे से नहीं हो सकती। इसलिए इसे विश्वभाषा की माता का गौरव दिलाइए। आप संवर्धन के लिए आगे आइये, हम सरंक्षण में पूरा सहयोग देंगे।
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