प्रदेश सरकार सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत मानदेय शिक्षकों को नियमित करेगी। यह एलान संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने शुक्रवार को विधानसभा में उप्र. उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग संशोधन विधेयक-2018 को पेश करते हुए किया।
बाद में विपक्ष की ओर से रखे गए संशोधन प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए विधान परिषद ने विधेयक पास कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्ष की आंशकाओं को खारिज करते हुए आश्वासन दिया कि मानदेय शिक्षकों के नियमितीकरण में आरक्षण के प्रावधानों का पालन कराया जाएगा। इस विधेयक के तहत 29 मार्च 2011 या उससे पूर्व नियुक्त मानदेय शिक्षक नियमित किए जाएंगे।
खन्ना ने बताया कि 7 अप्रैल 1998 के शासनादेश से प्रदेश के सहायता अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी से मानदेय के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। 29 मार्च 2011 को यह शासनादेश रद्द किए जाने तक नियुक्ति की जाती रही।
28 दिसंबर 2006 तक कार्यरत ऐसे शिक्षकों को नियमित कर दिया गया जो न्यूनतम तीन शैक्षिक सत्रों तक कार्य कर चुके थे। सरकार ने अब बाकी बचे मानदेय शिक्षकों को नियमित करने का फैसला किया है।
विधेयक के मुताबिक ऐसे सभी मानदेय शिक्षक अब नियमित किए जाएंगे जो 7 अप्रैल 1998 के शासनादेश के प्रावधानों के अनुसार 29 मार्च 2011 को या उससे पूर्व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में नियुक्त हों और निर्धारित शैक्षिक अर्हता रखते हों, इस विधेयक के अधिनियम केरूप में प्रारंभ होने पर कार्यरत हों और राजकोष से मानदेय प्राप्त कर रहे हों। हालांकि इसके लिए रिक्ति का होना जरूरी है।