बेमौसम बारिश और ओलों से प्रभावित किसानों का मामला मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में भी छाया रहा। मौसम की मार से बर्बाद हुए किसानों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी मशीनरी के साथ-साथ प्रभारी मंत्रियों को भी जिलों में जाकर हालात का जायजा लेने और जल्द से जल्द नुकसान की रिपोर्ट तैयार कराकर भेजने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारियों को प्रभावित किसानों को दी जाने वाली मदद सीधे बैंक खाते में भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर कैम्प लगाकर चेक के जरिये बांटने को कहा गया है। वहीं, 50 फीसदी से कम फसल के नुकसान पर भी राहत देने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के बाद फसलों को हुए भारी नुकसान और किसानों की मौतों पर चर्चा हुई। मंत्रियों ने सरकार की ओर से राहत का पैसा जारी किए जाने के बावजूद किसानों को मुआवजा न मिलने पर चिंता जताई।
कैबिनेट ने प्रभावित किसानों को ज्यादा से ज्यादा राहत देने पर जोर दिया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे कराकर तत्काल शासन को नुकसान की रिपोर्ट भेजी जाए। उन्हें स्थानीय स्तर पर भी प्रभावित किसानों की मदद के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने अपनी आकस्मिकता निधि से भी पैसा जारी किया है।
केंद्र ने दिए सिर्फ 44 करोड़
सीएम ने कहा कि सरकार ने आपदा में मरने वालों के परिवारीजनों को सात लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है। फसलों के नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे की राशि दोगुनी कर दी गई है।
केंद्र सरकार ने सिर्फ 44 करोड़ रुपये दिए हैं जबकि राज्य सरकार पहले 200 करोड़ जारी कर चुकी है। 300 करोड़ रुपये और जारी किए गए हैं। बुधवार को केंद्रीय टीम नुकसान का आकलन करने आ रही है। केंद्र के भी मंत्री आ रहे हैं। हमारे मंत्री भी जिलों में जा रहे हैं। जल्द नुकसान का आकलन करके रिपोर्ट दी जाए, जिससे राहत देने के काम में तेजी आ सके।
सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा के बारे में रिपोर्ट आई है। वहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि मथुरा के डीएम ने बिल्कुल सही रिपोर्ट भेजी है। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां 50 फीसदी से कम फसल का नुकसान हुआ है वहां के किसानों को भी राहत देने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
सोमवार से हरकत में आई थी सरकार
आपदा प्रभावित किसानों तक मदद न पहुंचने की खबरों के बाद सोमवार को सरकार हरकत में दिखी थी। सरकार ने माना कि बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से अब तक 40 जिलों में फसलों को 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान और 35 लोगों की मौत हुई है।
इसके विपरीत अभी तक केवल 175 करोड़ रुपये की राहत राशि का वितरण हो सका है। सोमवार को राहत के लिए 300 करोड़ रुपये और जारी करने के निर्देश दिए गए थे।
कलेक्टरों से कहा गया है कि वे कैंप लगाकर तीन दिन में राहत राशि बांट दें। जितनी और धनराशि की जरूरत है, उसे वे टीआर-27 (आकस्मिकता निधि) से निकाल लें। सरकार ने सदमे से किसानों की मौत को नकार दिया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहां प्रभावित किसानों की मदद के लिए 300 करोड़ रुपये रिलीज करने के निर्देश दिए वहीं मुख्य सचिव आलोक रंजन ने वीडियो क्रांफ्रेंसिंग करके राहत राशि के वितरण के लिए कलेक्टरों और कमिश्नरों के पेंच कसे।
शाम को उन्होंने मीडिया के सामने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार को 33 जिलों में 744 करोड़ रुपये के नुकसान और 22 किसानों की मौत की रिपोर्ट भेजी गई थी।