यदि आप 33 रुपये प्रतिदिन से ज्यादा कमाते हैं तो महिला एवं बाल विकास विभाग आपको गरीब नहीं मानेगा।
साथ ही आपको विभाग की योजना का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने लालन पोषण व देखभाल योजना में 12 हजार रुपये सालाना तक आय वाले परिवारों को ही इसका लाभ देने की अटपटी शर्त लगा दी है।
इस योजना में गरीब परिवारों के बच्चों को 500 रुपये व अधिकतम दो बच्चों के लिए एक हजार रुपये महीना दिया जाना है।
इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम (आईसीपीएस) के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने हाल ही में ‘स्पांसरशिप’ व ‘फोस्टर केयर’ योजना शुरू की है।
इसमें बाल गृह व बालिका निकेतन में रह रहे गरीब परिवारों के बच्चों को उनके घर भेजने के लिए सरकार आर्थिक मदद देगी। सरकार यह मदद लगातार तीन साल तक देगी।
इसमें उन बच्चों को शामिल किया जाएगा जो बाल श्रम में पकड़े जाने के कारण बाल गृहों में रह रहे हैं।
कई बच्चे घरों से भागकर आ जाते हैं। गलत संगत के कारण अपराधों में लिप्त इन बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए यह योजना बनाई गई है।
इस योजना में उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और वे अपने बच्चों का ढंग से लालन-पोषण नहीं कर पा रहे हैं।
इन परिवारों के बच्चों को सरकार 500 रुपये प्रति बच्चा अधिकतम दो बच्चों के लिए यानी 1000 रुपये महीना देगी।
लेकिन सरकार ने इसमें 12 हजार रुपये सालाना से कम आय की शर्त लगा दी है। यानी इस योजना में उन्हीं बच्चों को शामिल किया जाएगा जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 12 हजार रुपये से ज्यादा न हो।
सरकार की इस अटपटी शर्त के कारण इस योजना के लाभार्थी मिलना भी मुश्किल हो जाएंगे। आजकल मजदूर भी 200 से 300 रुपये प्रतिदिन कमा लेता है।
गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों में शामिल होने के लिए भी ग्रामीण इलाकों में 19 हजार व शहरी इलाकों में 24 हजार रुपये सालाना का नियम है। ऐसे में महिला एवं बाल विकास के ये मानक किसी के भी गले नहीं उतर रहे।
केंद्र के मानकों के कारण कम की गई आय
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार केंद्र के मानकों के कारण ही प्रदेश को भी 12 हजार रुपये सालाना की वार्षिक आय का प्रावधान करना पड़ा।
पहले इस योजना में शहरी व ग्रामीण दोनों के लिए अलग-अलग आय के मानक तय किए गए थे। शहरी क्षेत्र में 25546 रुपये व ग्रामीण क्षेत्र में 19884 रुपये तक आय वाले परिवारों को इसका लाभ देने की योजना बनी थी।
इसका शासनादेश भी जारी कर दिया गया था, लेकिन केंद्र के दिशा-निर्देशों के बाद आय के मानक घटाए गए हैं।