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एससी-एसटी को न्यायपालिका में आरक्षण देना चाहती है सरकार: कानून मंत्री रवि शंकर

Tue, 25 Dec 2018 01:43 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नेशनल ज्यूडिशियल अपाइंटमेंट कमीशन (एनजेएसी) के गठन को असंवैधानिक बताने पर ऐतराज जताते हुए कहा कि  सरकार जजों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के पक्ष में हैं। सरकार न्यायपालिका में अनुसूचित जाति, जनजाति को आरक्षण देना चाहती है। 
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रविशंकर प्रसाद ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के 15वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कहा कि एनजेएसी पर हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को माना लेकिन इस पर हमारा मतभेद है। एनजेएसी एक्ट हमने संसद में पारित किया। 50 फीसदी से ज्यादा राज्यों ने मंजूरी दी।

राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। सुप्रीम कोर्ट के नंबर-2 और नंबर-3 जज इसके सदस्य थे। गौरतलब है कि सरकार ने जजों की नियुक्ति व तबादलों के लिए एनजेक्सी एक्ट बनाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था।
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तीन तलाक इबादत का विषय नहीं

रवि शंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्रिपल तलाक इबादत से जुड़ा विषय नहीं है। यह नारी गरिमा और सम्मान से जुड़ा हुआ है। 22 इस्लामिक मुल्कों में इसे नियंत्रित किया गया है। पाकिस्तान की लीगल बॉडी भी इसमें संशोधन का प्रस्ताव बना रही है। ट्रिपल तलाक पर संसद में 27 दिसंबर को बिल लाया जाएगा। इसमें कई संशोधन किए गए हैं। समझौते का प्रावधान भी शामिल किया गया है।

रविशंकर प्रसाद ने हिंदुओं की भावनाओं और सम्मान के लिए सुप्रीम कोर्ट से रामजन्मभूमि पर फास्ट ट्रैक से सुनवाई करने की अपील की । कहा, सबरीमाला पर 6 माह में फैसला आ जाता है। आतंकियों की फांसी रोकने के लिए भोर में सुनवाई होती है, लेकिन राम जन्मभूमि का मामला 10 साल से विचाराधीन है। 
 
केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बोले प्रधानमंत्री सरकार का हेड होता है। वे न्यूक्लियर का बटन दबा सकते हैं, लेकिन ईमानदार जज नियुक्त नहीं कर सकते। हम महसूस करते हैं कि एनजेएसी पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट की चिंता संविधान के अनुरूप नहीं थी। 
 
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