यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (यूपीएमएससीएल) के माध्यम से प्रदेश में 200 कम्प्यूटर खरीदने के मामले में देरी होने पर शासन ने सख्त कार्रवाई का मन बना लिया है। कोरोना महामारी काल में चार महीने से खरीद प्रक्रिया पूरी न होने के मामले में यूपीएमएससीएल के अधिकारियों से पूछताछ होगी। साथ ही इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग की कमेटी से तय मूल्य से ज्यादा का टेंडर देने के मामले में भी जांच की जाएगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने वेंटीलेटर खरीद में लापरवाही व अधिक दर पर टेंडर खोले जाने को गंभीरता से लिया है। शासन के सूत्रों के अनुसार इस मामले में यूपी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन और चिकित्सा शिक्षा विभाग के पत्राचार के बाद मामला और बिगड़ गया। अधोमानक पीपीई किट की तरह ही चिकित्सा शिक्षा विभाग ने वेंटीलेटर खरीद में भी यूपीएमएससीएल की खरीद प्रक्रिया पर उंगली उठा दी है। इस बार वेंटीलेटर 92 हजार रुपये प्रति यूनिट अधिक की खरीद पर सवाल उठाए गए हैं।
अधिक रेट के मामले को लेकर यूपीएमएससीएल के पत्र के बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने अपने स्तर से निर्णय लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद से ही पूरी प्रक्रिया ठप हो गई। क्योंकि शासन स्तर की कमेटी से तय रेट से ज्यादा दर पर कार्पोरेशन वेंटीलेटर खरीद नहीं सकता है। इसी बीच केंद्र से प्रदेश को वेंटीलेटर मिलने शुरू हो गए तो पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इसी बीच अमर उजाला में 09 अगस्त को खबर छपने के बाद एक बार फिर से कोराना महामारी काल की इमरजेंसी में खरीद प्रक्रिया में लापरवाही और अधिक दर पर टेंडर देने का मामले में जांच की कार्रवाई शुरू हुई है।