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स्मार्ट सिटी : नई योजनाओं पर ब्रेक, अब नहीं मिलेगा पैसा

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प्रवेंद्र गुप्ता, लखनऊ। शहरों को स्मार्ट बनाने की केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना बंद होने वाली है। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के10 शहरों में यह योजना चल रही है, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार आधा-आधा पैसा देती हैं। मार्च के बाद से दोनों सरकारों ने पैसा देने से इनकार कर दिया है। साथ ही यह आदेश भी दिया है कि योजना के तहत जो भी प्रोजेक्ट चल रहे हैं उनका काम जून 2023 तक पूरा कर लिया जाए।
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केंद्र में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वर्ष 2014 में अमृत मिशन योजना लॉन्च हुई थी। दावेदारों को शामिल होने के लिए अपनी योजनाएं और जनता का फीडबैक देना था। इसी के आधार पर प्रदेश के 10 शहर स्मार्ट सिटी योजना में अलग-अलग राउंड में शामिल किए गए। वर्ष 2016 में लखनऊ फास्ट ट्रैक राउंड में चुना गया। इसके अलावा कानपुर, वाराणसी, आगरा दूसरे राउंड में चुने गए। अलीगढ़, प्रयागराज, झांसी तीसरे राउंड में और बरेली, शहजहांपुर, मुरादाबाद चौथे राउंड में चुने गए। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के कामकाज और अवस्थापना सुविधाओं को स्मार्ट बनाने के लिए लखनऊ में करीब 2100 करोड़ रुपये की योजनाएं बनी थीं। उनमें ज्यादातर योजनाएं अमृत मिशन व अन्य योजनाओं से मिलने वाले बजट (कन्वर्जन) से पूरी की जानी थीं। वहीं, करीब 850 करोड़ रुपये की योजनाओं का काम केंद्र व राज्य सरकार से योजना को लेकर मिलने वाले बजट से किया जा रहा है। इसे लेकर केंद्र सरकार की ओर से बजट भी जारी किया जा चुका है।
नया प्रोजेक्ट लाए तो खुद उठाना होगा खर्च
प्रदेश में स्मार्ट सिटी योजना के मिशन निदेशक इंद्रमणि त्रिपाठी का कहना है कि स्मार्ट सिटी योजना मेें अब जो नए प्रोजेक्ट आएंगे उनके लिए केंद्र सरकार बजट नहीं देगी। इसे लेकर केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने आदेश भी जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि 31 मार्च 2022 के बाद जिन योजनाओं के वर्क ऑर्डर जारी होंगे उनके लिए केंद्र सरकार बजट नहीं देगी। प्रदेश सरकार ने भी इस संबंध कोई समय नहीं बढ़ाया है। ऐसे में यदि कोई स्मार्ट सिटी 31 मार्च के बाद नया प्रोजेक्ट लाएगा तो उसका खर्च उसे खुद ही वहन करना होगा।
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कई योजनाओं को लगेगा झटका
लखनऊ स्मार्ट सिटी कंपनी स्काई वॉक, हेरिटेज पार्क बनाने सहित कई नए प्रोजेक्ट लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी लाने की तैयारी है। अब नया आदेश आने के बाद इन योजनाओं के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार से बजट नहीं मिल पाएगा। ऐसे में यदि नए प्रोजेक्ट लखनऊ स्मार्ट सिटी कंपनी लाई तो उसे खुद उसका खर्च उठाना होगा।
अधिकारियों को भेजा पत्र
मिशन निदेशक स्मार्ट सिटी इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि सभी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारिणी अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है कि 31 मार्च के बाद जिन भी योजनाओं के वर्क आर्डर जारी होंग, टेंडर होंगे या नए प्रोजेक्ट लाएंगे उनका पैसा केंद्र सरकार नहीं देगी। प्रदेश में केंद्र सरकार से चयनित जो 10 स्मार्ट शहर हैं उनसे रिपेार्ट मिल गई है वहां पर सभी प्रोजेक्ट के वर्क आर्डर 31 मार्च तक जारी हो चुके हैं। योजना के जो काम चल रहे हैं, उनको जून 2023 तक पूरा करने का भी आदेश दिया गया है।
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