ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सायम मेंहदी ने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड पर राय तभी दी जा सकती है जब सरकार यूसीसी को परिभाषित करे। उन्होंने कहा कि सरकार यूसीसी क्या चाहती है ये बताने के बाद ही हम हां या नही में जवाब देंगे। उन्होंने आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने के बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बयान पर सवाल उठाया।
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सायम मेंहदी ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने यूसीसी पर जानकारी हासिल करने के लिये लॉ कमीशन का गठन किया है। लॉ कमीशन ने 15 जुलाई तक लोगों से इस पर अपनी-अपनी राय देने को कहा है। मौलाना ने कहा कि हम अपनी राय और सुझाव उस वक्त दे सकते हैं जब सरकार यूसीसी को परिभाषित कर बताये कि वो क्या चाहती है और उसके मुताबिक यूसीसी क्या है।
मेंहदी ने कहा कि देश में तमाम धर्म के मानने वालों को अपने धर्म का पालन करने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों में शिया-सुन्नी, बुद्ध, जैन, सिख, ईसाई, हिन्दू सभी के अपने अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व भाजपा नेता सुशील मोदी ने आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखे जाने का बयान दिया था।
उन्होंने कहा कि क्या आदिवासी हिन्दुस्तानी नहीं हैं या फिर आप जिसको चाहेंगे उसे यूसीसी में शामिल करेंगगे और जिसको चाहेंगे उसे अलग रखेंगे। उन्होने कहा कि सरकार सुशील मोदी के बयान पर भी अपनी राय साफ करे। उन्होंने कहा कि यूसीसी तमाम धर्म के मानने वालों को नुकसान पहुंचाएगा।