शासन ने लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) क्षेत्र की भूमि पर अवैध कब्जे की खबरों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
लीडा के सीईओ और प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास डॉ. एसपी सिंह ने अवैध कब्जेदारों को चेतावनी दी है कि वे अवैध कब्जे व निर्माण तत्काल हटा लें अन्यथा उनके खिलाफ बेदखली के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वे लीडा के मास्टर प्लान से जुड़ी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में लीडा के ड्राफ्ट मास्टर प्लान - लीडा : 2031 का प्रस्तुतीकरण हुआ।
सिंह ने मुख्य परामर्शी टेकमेक द्वारा मास्टर प्लान तैयार करने में देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि 10 अगस्त तक मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पेश नहीं किया गया तो सरकार कांट्रैक्ट रद्द कर नया परामर्शी चुनेगी।
टेकमेक को 2010 में छह महीने के भीतर मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
प्रमुख सचिव ने ड्राफ्ट रिपोर्ट में आवश्यक स्वीकृतियों व अनापत्तियों को भी शामिल करने का भी निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा कि विकास के लिए भूमि अधिग्रहण के पहले मास्टर प्लान बनना चाहिए ताकि अवैध कब्जे की समस्या न हो।
प्रदूषण रहित इकाइयां शामिल करने की शर्त खत्म बैठक में प्रमुख सचिव ने लीडा के मास्टर प्लान में सभी तरह की इकाइयों को शामिल करने का निर्देश दिया है।
पूर्व में केवल प्रदूषण रहित औद्योगिक इकाइयों को शामिल करने की बात कही गई थी।
लीडा ने 33684 हेक्टेयर क्षेत्र को लखनऊ में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित किया है।
इसके अंतर्गत करीब 285 करोड़ रुपये की लागत से 1.30 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आईटी पार्ककी स्थापना की जानी है। इसके लिए लीडा को नोडल एजेंसी बनाया गया है।