उधर, क्रेडाई के पदाधिकारियों में कई की यह राय थी कि सबके लिए चुनौतियां अलग-अलग है। लिहाजा सबके लिए एक नियम बनाने के बजाय प्रमोटर से पूछकर उसके मुताबिक परियोजना पूरा करने का समय तय किया जाए। वहीं, यह भी मांग की गई है कि दूसरे प्रदेशों से आने वाले स्किल्ड लेबर को साइट तक लाने में कोई व्यवधान न पैदा किया जाए। सूत्रों का कहना है कि इन सुझावों को प्रस्ताव में शामिल किया जा सकता है।
उधर, आवास विभाग के एक उच्चपदस्थ सूत्र के मुताबिक रीयल एस्टेट परियोजनाओं को शुरू कराने के लिए सरकार क्रेडाई की ज्यादातर मांगों को मान लेगी। इसके तहत अगर काम करने वाली साइट्स पर कोई मजदूर कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो इसके लिए बिल्डर पर आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज कराया जाएगा।