ग्लोबल इंवेस्टर समिट -23 में दस लाख करोड़ के निवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने प्रदेश के साथ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास शुरू किया है। योगी सरकार ने 89 दूतावासों, विदेशी औद्योगिक संगठनों, विदेश मंत्रालय और इंवेस्ट इंडिया को पत्र लिखकर निवेश और उद्योगों से संबंधित कई जानकारियां मांगी है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि समिट में सर्वाधिक विदेशी निवेश आए इसके लिए विदेशों में ऐसे सेक्टर्स को भी चिह्नित किया जा रहा है जिनमें प्रदेश में निवेश की संभावनाएं ज्यादा हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीआईएस-23 की कमान खुद के हाथ रखी है। सीएम खुद समय-समय पर इसकी समीक्षा कर रहे हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ डीआई) को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने के लिए कई बिंदुओं पर फोकस किया जा रहा है। विभागों की ओर से विदेशी निवेशकों को ध्यान में रखकर दो दर्जन से ज्यादा नीतियों को अपग्रेड किया जा रहा है। साथ ही कई नई नीतियां भी लाई जा रही हैं।
औद्योगिक विकास एवं अवस्थापना विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि प्रदेश को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला प्रदेश बनाने में जीआईएस-23 बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि रोड शो के दौरान विदेशों में सरकार की नीतियों और प्रदेश के बदले हुए माहौल के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि अधिक से अधिक विदेशी निवेश प्रदेश में लाया जाए।
ये नीतियां करेगी निवेश का लक्ष्य पूरा
अरविंद कुमार का मानना है कि जीआईएस-23 में 10 लाख करोड़ के निवेश के लक्ष्य को पूरा करने में विभागों की नीतियां कारगर बनेगी। खाद्य प्रसंस्करण नीति, डिफेंस और एयरो स्पेश विनिर्माण नीति, इलेक्ट्रानिक्स नीति, एमएसएमई नीति, औषधि निर्माण नीति, फार्मा नीति, वस्त्रोद्योग नीति, वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति, नागरिक उड्डयन नीति, सूचना प्रोद्योगिकी नीति, ऑक्सीजन उत्पादन नीति, दुग्ध नीति, ईवी नीति, सौर ऊर्जा नीति, पर्यटन नीति, निजी औद्योगिक पार्क नीति, बायो फ्यूल नीति, डाटा सेंटर नीति, स्टार्टअप नीति, पोस्ट कोविड निवेश नीति, वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स नीति और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति 2020 प्रमुख है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा नीति, उत्तर प्रदेश आईटी नीति, एनिमेशन और कॉमिक्स नीति भी है।