देसी गायों की उपयोगिता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने इन गायों के दूध का सर्वाधिक उत्पादन करने वालों को ‘नंद बाबा पुरस्कार’ देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह पुरस्कार ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर दिए जाएंगे।
सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में गौपालन को बढ़ावा देने और दुग्ध उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए नंद बाबा पुरस्कार योजना लागू की गई है।
प्रति वर्ष दुग्ध उत्पादक संघ को कम से कम 1500 लीटर देसी गाय का दूध बेचने वालों को ब्लॉक स्तर पर 5100, जिला स्तर पर 21 हजार और प्रदेश स्तर पर 51 हजार रुपये नकद पुरस्कार, शील्ड और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
इसके लिए उत्पादक को सहकारी संघ के तहत गठित दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का सदस्य होना अनिवार्य है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में पुरस्कार के लिए 52.01 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है।
उन्होंने कहा कि उत्पादकों के चयन के लिए विकास खंड स्तर पर विकास अधिकारी, जिला स्तर पर डीएम और प्रदेश स्तर पर मुख्य महाप्रबंधक पीसीडीएफ की अध्यक्षता में चयन समिति गठित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में भारतीय नस्ल की देसी गायों की संख्या 15,97,8000 है। प्रत्येक देसी गाय से रोज 2.57 लीटर दुग्ध उत्पादन होता है। इस तरह प्रति वर्ष इन गायों से 45,46000 टन दूध का उत्पादन होता है।