सूत्रों ने बताया कि सरकार को लगातार शिकायत मिल रही थी कि कई कर्मचारी नाजायज तरीके से बेहिसाब संपत्ति बढ़ा रहे हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर लाखों के मकान, फ्लैट, महंगी गाड़ियां लेकर चलते हैं। कई कर्मचारियों ने अपने 10 से 15 वर्ष के सेवाकाल में ही अपने पूरी सर्विस से होने वाली आय से अधिक संपत्ति बना ली है। लेकिन शासन के पास इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।
पिछले 15 वर्षों में ऐसे कर्मियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही न होने से ईमानदार कर्मियों में सिस्टम के प्रति आक्रोश बढ़ता है। 10 दिसंबर को सचिवालय के एक कर्मी की आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तारी के बाद शासन ने नियमानुसार सभी सरकारी कर्मियों की संपत्ति का हिसाब-किताब लेने का आदेश जारी कर दिया। शासन ने सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में दी गई व्यवस्था का हवाला देकर अचल संपत्ति का ब्योरा तलब किया है।