प्रदेश में सरकारी सेवाओं में कार्यरत अन्य पिछड़ा वर्ग की सभी जातियों का आकलन कराया जाएगा। राज्य सरकार उनकी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की भी पड़ताल कराएगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के बाद रिटायर्ड जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में 2 मई को गठित चार सदस्यीय कमेटी किन बिंदुओं पर विचार करेगी, उसकी विषय वस्तु तय कर दी गई है।
कमेटी तीन महीने में सरकार को रिपोर्ट देगी। प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण ने बुधवार को इस बारे में आदेश जारी कर दिए।
प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि समिति पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार की सभी योजनाओं, व्यवस्थाओं व सुविधाओं का विश्लेषण करेगी।
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पिछड़े वर्ग के तहत विभिन्न वर्गों व जातियों की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति का कमेटी आकलन करेगी। समिति ओबीसी के लिए निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के तहत सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग की विभिन्न जातियों की भागीदारी के साथ ही आरक्षण व्यवस्था के अधीन शैक्षणिक क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के विभिन्न वर्गों एवं जातियों की भागीदारी भी देखेगी।
यह भी करेगी समिति
आरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए अन्य राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन।
अदालतों के प्रतिपादित सिद्धांतों का सामाजिक न्याय के लिए कैसे उपयोग किया जा सकता है, सुझाव देगी
पिछड़ा वर्ग के कल्याण के लिए चलाई जा रही सभी योजनाओं को सामाजिक न्याय के नजरिए से और प्रभावी बनाने के संबंध में सुझाव ।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राघवेंद्र कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जेपी विश्वकर्मा, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स विभाग के प्रो. भूपेंद्र विक्रम सिंह और आजमगढ़ के अधिवक्ता अशोक कुमार राजभर शामिल हैं।