चतुर्थ श्रेणी के पदों के साथ-साथ कुछ विशिष्ट व तकनीकी कार्य के लिए सृजित वाहन चालक, माली, वायरमैन, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर, मिस्त्री, लिफ्टमैन, एसी मैकेनिक व अन्य इसी प्रकार के रिक्त होने वाले पदों पर नियमित नियुक्ति न की जाए। ये सेवाएं आउटसोर्सिंग के जरिए कराई जाएं। आउटसोर्सिंग से भर्ती शासन द्वारा संवर्ग विशेष में स्वीकृत पदों के सापेक्ष ही वित्त विभाग की सहमति से कराई जाए।
सरकार ने नव वर्ष व अन्य अवसरों पर सरकारी खर्च पर बधाई संदेशों को भेजने, कैलेंडर, डायरी तथा पर्सनल लेटर आदि की छपाई व वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्देश स्वायत्तशासी संस्थाओं व प्राधिकरणों पर भी समान रूप से लागू होंगे।
केंद्र व राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित कुछेक योजनाओं के संचालन के लिए कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को राज्य सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए स्वीकृत दरों के अनुरूप ही टीए, डीए, एचआरए, सीसीए, एलटीसी, चिकित्सा प्रतिपूर्ति आदि का भुगतान स्वीकृत होगा। यदि किसी संस्था में इससे इतर भत्ते दिए जा रहे हैं, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। यदि इसमें कोई वैधानिक कठिनाई है तो इसके लिए व्यवस्था में संशोधन की कार्यवाही कराने को कहा गया है।
कई विभाग वित्त वर्ष के आखिरी महीनों, फरवरी व मार्च में बड़ी रकम खर्च करने के लिए जाने जाते हैं। कई तो अपने बजट का बड़ा हिस्सा दबाए बैठे रहते हैं। मार्च लूट के रूप में इसकी चर्चा होती है। सीएजी भी इस पर आपत्ति जताता रहा है।
योगी सरकार ने समय से वित्तीय स्वीकृतियों व खर्चों पर दबाव बनाया है। लेकिन इस आदेश से मार्च लूट पर प्रभावी अंकुश की संभावना है। मुख्य सचिव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष के फरवरी और मार्च में तत्काल आवश्यकता के अलावा उपकरण, मशीन व स्टेशनरी की खरीद नहीं की जाएगी।
प्रदेश सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा पर किए जा रहे भारी खर्च को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने तथा निजी विद्यालयों से प्रतिस्पर्धा योग्य बनाने के लिए शिक्षक-छात्र अनुपात का कड़ाई से पालन किया जाए। सरप्लस शिक्षकों का यथासंभव समायोजन आवश्यकता अनुसार अलग कर दिया जाए।