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छब्बे बनने गए थे दुबे बनकर लौटे

Tue, 02 Sep 2014 02:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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एक कहावत है कि गए थे छब्बे बनने गए और दुबे बनकर लौट आए।
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शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के साथ भी ऐसा ही हुआ। निदेशक पद पर पदोन्नति के बाद इन्हें शासकीय कामों में लगा दिया गया।

पर उनका मन तो निदेशक की सबसे बड़ी कुर्सी पाने के लिए ही छटपटाता रहा। इसके लिए उन्होंने हर नुस्खा अपनाया।

सेटिंग, गेटिंग का फॉर्मूला भी अपनाया। एक समय तो ऐसा लगा कि अब वह कुर्सी से मात्र चंद कदम के फासले पर ही हैं, लेकिन अचानक बाजी पलट गई।

उनके हाथ जो कुर्सी आई उसका विभाग में महत्व न के बराबर है।

अब विभाग में इस बात की खूब चर्चा है कि साहब चले थे छब्बे बनने और दुबे बनकर लौट आए।
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