लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को मिली करारी हार के बाद प्रभारी मंत्रियों की भी खूब किरकिरी हुई। नेताजी ने कुछ मंत्रियों के विभाग बदल दिए तो कुछ को महत्वहीन कर दिया।
बुनियादी शिक्षा वाले मंत्रीजी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। बच्चों को खिलाकर पुष्ट रखने वाला विभाग उनके हाथ से फिसल गया।
चर्चा तो यहां तक थी कि उपचुनाव का रिजल्ट खराब आया तो बुनियादी शिक्षा विभाग भी जाता रहेगा। इसलिए जैसे ही उपचुनाव की अधिसूचना जारी हुई, वे चरखारी में भाजपा को चरखा दांव देने में जुट गए।
भूल गए कि उनके पास बुनियादी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी है। बस चरखारी में ही पड़े रहे। परिणाम मनमुताबिक आया तो उनकी उम्मीदों को भी पंख लगे।
उनके चहेते फूले नहीं समा रहे। कहते हैं-भाजपा के भले ही अच्छे दिन न आए हों पर अपने मंत्रीजी के शायद अच्छे दिन आ जाएं।