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क्या है सिर्फ चुनावी विरोध है?

Mon, 11 Aug 2014 11:17 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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राजनीति चीज ही ऐसी है कि बड़े-बड़े नहीं समझ सकते कि कब, कहां, क्या गुल खिल जाएगा।
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फिर बड़े नेताओं के कहने ही क्या?

विचारधारा की दुहाई देकर एक-दूसरे पर हमला बोलते रहने वाले पार्टियों के नेताओं के आपसी रिश्तों को समझ पाना कम से कम आदमी के बस की बात नहीं है।

अब ठाकुर साहब को ही ले लें तो यूपी की समाजवादी सरकार के प्रति उनका ‘सॉफ्ट कार्नर’ खुद उनकी ही पार्टी में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मंत्रीजी को भले ही प्रदेश की कानून-व्यवस्था में कोई खोट न दिखाई देता हो लेकिन नोएडा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे उनके सुपुत्र इस मुद्दे को लेकर खासे आक्रामक दिख रहे हैं।
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वे राजभवन जाकर ज्ञापन भी दे आए। अब चूंकि बेटे को चुनाव जिताकर राजनीति में ‘स्टेब्लिश’ करना है, इसी राजनीतिक चतुराई के चलते ठाकुर साहब समाजवादी सरकार के प्रति ‘सॉफ्ट कार्नर’ रखे हुए हैं।
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वहीं पब्लिक नूरा-कुश्ती को समझ न सके, इसलिए पुत्र को थोड़ा-बहुत विरोध करने का इशारा कर दिया है।
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