मुद्रा लोन योजना का यूपी के कारोबारियों ने भरपूर फायदा उठाया है। 42 लाख व्यापारियों ने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का मुद्रा लोन लिया है। इसमें 50 हजार से पांच लाख तक का लोन लेने में गोरखपुर और पांच से दस लाख तक का कर्ज लेने में लखनऊ सबसे आगे हैं। इसका खुलासा राज्य स्तरीय बैंकिंग समिति को बैंकों की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट से हुआ है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रीफाइनेंसिंग एजेंसी लिमिटेड) योजना लांच की थी। इसकी शुरुआत गैर कॉरपोरेट और गैर कृषि क्षेत्र को दस लाख रुपये तक का कर्ज देने के लिए की गई थी। ये लोन शिशु, किशोर और तरुण तीन तरह के हैं। शिशु में 50 हजार तक, किशोर में पांच लाख तक और तरुण के तहत दस लाख रुपये तक का लोन देने की व्यवस्था है।
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शिशु व किशोर लोन का लाभ लेने वालों में गोरखपुर के कारोबारी नंबर वन हैं। ये संख्या 2.65 लाख से भी ज्यादा है। सबसे ज्यादा 1522 करोड़ रुपये गोरखपुर को बैंकों ने दिए। 968 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर लखनऊ और तीसरे नंबर पर प्रयागराज (937 करोड़ रुपये) है। कानपुर नगर को केवल 655 करोड़ रुपये दिए गए।
पांच से दस लाख रुपये तक तरुण लोन लेने के मामले में सबसे आगे लखनऊ और दूसरे नंबर पर कानपुर नगर है। लखनऊ के 6200 और कानपुर के 6000 व्यापारियों ने इसका लाभ उठाया है। तीसरे नंबर पर गोरखपुर है, जहां 4100 व्यापारियों ने दस लाख तक का लोन लिया। बड़े लोन में महोबा, संभल, श्रावस्ती, चित्रकूट और हमीरपुर की स्थिति खराब है। यहां औसत 360 व्यापारियों को ही लोन मिला है।
50 हजार लोन वाले व्यापारियों की संख्या रिकार्डतोड़
प्रदेश में मुद्रा योजना का लाभ कुल 42 लाख व्यापारियों को मिल रहा है। इसमें 32 लाख व्यापारी सिर्फ 50 हजार रुपये का लोन लेने वाले हैं। प्रदेश में दस लाख रुपये लेने वाले व्यापारियों की संख्या 1.17 लाख है। साफ है कि छोटे व्यापारी को मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है, जिसमें मुद्रा योजना सफल साबित हो रही है।