कोड प्लस की जानकारी देते गूगल मैप के प्रोग्राम मैनेजर
- फोटो : amarujala
4/1121 इस्माइलगंज, मुंशीपुलिया चौराहे से दाईं तरफ करीब 500 मीटर दूर। लखनऊ में अब इस तरह के पते की जगह गूगल का डिजिटल पता ‘कोड प्लस’ लेगा। छह डिजिट का होगा अल्फा-न्यूमेरिक कोड। इसे सीधे गूगल मैप में सर्च कीजिए और लिंक पते पर पहुंचने का रास्ता पता चल जाएगा।
किसी को भी अपने घर तक आसानी से पहुंचाने के लिए गूगल ने कोड प्लस फीचर लॉन्च किया है। गोमतीनगर स्थित एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में गूगल मैप इंडिया के प्रोग्राम मैनेजर अनल घोष ने बताया कि लखनऊ सहित पूरे देश में पते को एक समान फॉर्मेट में नहीं लिखा जाता है।
इससे संबंधित पते तक पहुंचने के लिए काफी जूझना होता है। गूगल मैप में भी इसे सर्च करने में दिक्कत आती है और कई बार तो गलत लोकेशन सर्च हो जाती है। इस परेशानी को खत्म करने के लिए ही यह नया फीचर शुरू किया गया है। यह एक तरह से डिजिटल पता होगा।
बाइक-स्कूटी वालों को रास्ता दिखाने के लिए बटन मैप
कोड प्लस की जानकारी देते गूगल मैप के प्रोग्राम मैनेजर
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गूगल की टीम ने बताया कि अब चार पहिया, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अलावा दो पहिया वाहन चालकों के लिए भी बटन मैप एप में जोड़ा गया है। इससे मुख्य रास्तों के अलावा कम चौड़े वैकल्पिक रास्तों को बताया जा सकेगा जहां से चार पहिया तो नहीं जा सकती लेकिन दो पहिया वाहन गुजर सकती है।
इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हिन्दी में भी अब लोकेशन सर्च की जा सकती है। गूगल मैप में किसी भी लोकेशन को टैग करने के बाद उसकी विस्तृत जानकारी देखें। इस जानकारी में कोड प्लस भी दिखेगा।
इस छह डिजिट के कोड को नोट कर लें। जैसे लखनऊ में होटल रेनेशां का कोड वीएक्स3एफ प्लस 38 है। गूगल मैप में इस छह डिजिट के कोड को लखनऊ टाइप करके सर्च करने पर होटल की लोकेशन सर्च हो जाएगी।
पूरी दुनिया के मैप को इसी कोड मैप में बांटा जा रहा है। यह ओपन सोर्स है। इसके लिए कोई भी फीस भी नहीं ली जाएगी। इस कोड को अपना पता बताने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। यह गूगल कोड कभी नहीं बदलेगा।
मेमोरी कम तो भी चिंता नहीं
कोड प्लस की जानकारी देते गूगल मैप के प्रोग्राम मैनेजर
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अनल घोष ने बताया कि गूगल ने एक सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम सड़क से गुजर रहे लोगों के मोबाइल से मिल रहे सिग्नल का आकलन कर वहां की ट्रैफिक स्पीड, जाम की स्थिति का अंदाजा लगाता है।
इससे काफी हद तक सही परिस्थिति गूगल मैप के जरिए लोगों को बता दी जाती है। लोग इससे यह तय कर पाते हैं कि उन्हें बिजी रास्ते से गुजरना है। या, उसके लिए वैकल्पिक रास्ते का उपयोग कर अपनी यात्रा पूरी करनी है। अनल घोष का कहना है कि इस सूचना को लेते समय लोगों के मोबाइल डाटा या उसकी व्यक्तिगत जानकारी को हम नहीं लेते।
अनल घोष ने बताया कि छोटे शहरों में यह देखने में आया है कि लोगों के पास स्मार्टफोन हैं लेकिन उनकी मेमोरी और रैम बहुत कम होती है। ऐसे में उनके लिए हमने मैप गो फीचर लांच किया है। यह सीधे क्रोम ब्राउजर से लिंक होता है। इसमें एप या ऑफलाइन डाटा डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती।
गूगल लोकेशन के साथ-साथ आसपास के रेस्टोरेंट, शोरूम की भी पूरी जानकारी मिल रही है। यहां से सीधे खाना भी बुक किया जा सकता है। इसकी होम डिलीवरी भी कराई जा सकती है। इसके लिए गूगल मैप का एक्सप्लोर फीचर उपयोग करना होगा। लोकल गाइड प्रोग्राम की मदद से इसे और अधिक उपयोगी और सूचना वाला बनाया जा रहा है।