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सहकर्मी को छेड़ा तो रुकेगा इंक्रीमेंट

Sun, 10 Aug 2014 11:03 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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राज्य कर्मचारियों से संबंधित यौन उत्पीड़न के मामलों में अब पीड़िता को जल्द न्याय मिल सकेगा।
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ऐसे मामलों में जांच की दोहरी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। शिकायत की जांच अब एक ही कमेटी से कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर एक-दो या कई बरसों के लिए आरोपी अफसर या कर्मचारी की वेतनवृद्धि रोकी जा सकेगी।

सर्विस बुक में भी बैड एंट्री दी जाएगी। इतना ही नहीं इंक्रीमेंट की योग्यता की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है।

दफ्तरों में महिला कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न से निजात दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली तथा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन कर दिया गया है।
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गठित होगी एक समिति

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों में प्रदेश में अब तक शिकायत की पहले प्रारंभिक जांच होती थी। प्रथमदृष्टया आरोप सही नजर आने पर विस्तृत जांच की जाती थी।

इसके बाद ही कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था थी। इसमें काफी समय लग जाता था। नई व्यवस्था के तहत यौन शोषण अथवा यौन उत्पीड़न की शिकायत पर नियुक्ति अधिकारी जांच के लिए एक शिकायत समिति का गठन करेगा।

इसमें एक महिला सदस्य अनिवार्य रूप से शामिल की जाएगी। यह आरोपी को उस पर लगाए गए आरोपों की जानकारी देगी और एक निश्चित समय में सफाई मांगेगी।
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नियुक्ति प्राधिकारी को सौंपी जाएंगी रिपोर्ट

समिति दोनों पक्षों की सुनने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को सौंपेगी। यदि कमेटी ने आरोपों की पुष्टि की तो नियुक्ति प्राधिकारी जांच के नतीजे के आधार पर आरोपी के खिलाफ छोटे दंड की कार्रवाई कर सकेगा।

इसके लिए अलग से जांच कमेटी गठित करने की जरूरत नहीं होगी। प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार ने संशोधित नियमावली के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है।

क्या है यौन उत्पीड़न?
- गलत नीयत से छूना
- शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाना
- अश्लील साहित्य, तस्वीर या फिल्म दिखाना
-आपत्तिजनक इशारे या व्यवहार करना
- द्विअर्थी संवाद या टीका-टिप्पणी
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