नंदिनीनगर महाविद्यालय में चल रहे सुरों के महासमागम ग्रैंड फिनाले के समापन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सांसद ने गीतों से समां बांध दिया। मंच पर चढ़कर उन्होंने गाया कि ''''हमने सिखाया जिनको चलना संभल-संभल के, चलते हैं आज वो भी तेवर बदल-बदल के... इसके बाद वह हंसते हुए बोले कि अब माहौल बदल जाएगा।
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष व कैसरगंज सांसद एक बार फिर अपने चिर परिचत अंदाज में मंच पर गीत गाते दिखे। गाने के माध्यम से उन्होंने महिला पहलवानों का नाम लिए बिना तंज कसा। वहीं शायरी के जरिए विगत दिनों की मुश्किलों का दर्द छलक उठा।
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नंदिनीनगर महाविद्यालय में चल रहे सुरों के महासमागम ग्रैंड फिनाले के समापन के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सांसद ने गीतों से समां बांध दिया। मंच पर चढ़कर उन्होंने गाया कि ''''हमने सिखाया जिनको चलना संभल-संभल के, चलते हैं आज वो भी तेवर बदल-बदल के... इसके बाद वह हंसते हुए बोले कि अब माहौल बदल जाएगा।
उनका इशारा उन महिला पहलवानों की ओर था जिनको कुश्ती के दांवपेंच सिखाकर कई पदक दिलवाए और पहलवानों की ओर से उन्हें इस कदर आरोपों की गुरुदक्षिणा दी गई। सांसद का गीत सुनकर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। वहीं उदासी वाली शायरी के जरिए उनका दर्द भी सामने आ गया। हालांकि कैसरगंज सांसद का गीत के जरिए बड़ी से बड़ी बात कहने वाला अंदाज कोई नया नहीं है। उनके पास जब भी मंच व माइक होता है तो वह कोई कविता, गीत या शायरी बोलने से नहीं रुकते।