गोंडा जिले के छपिया के साबरपुर में स्थित पवन ईंट भट्ठे पर तीन दिसंबर की रात में मुनीम की धारदार हथियार से वारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में भट्ठा के ट्रैक्टर चालक समेत तीन आरोपियों को पकड़ा है। उनके पास से आलाकत्ल बांका व एक बाइक बरामद हुई है। आरोपियों ने बताया कि मुनीम उन्हें अपमानित करता था। अपमान का बदला लेने व 11 लाख रुपये हड़पने के लिए तीनों ने मिलकर मुनीम की बांका मारकर हत्या कर दी थी।
चार दिसंबर की सुबह मुनीम राम सजीवन वर्मा निवासी अमसिन दहलवा थाना गोसाईंगंज अयोध्या का शव पवन ईंट भट्ठा साबरपुर के कार्यालय के बरामदे में मिला था। भट्ठा मालिक काशीराम वर्मा निवासी दहीरपुर अयोध्या ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी विनीत जायसवाल ने बताया कि ने एएसपी पूर्वी मनोज कुमार रावत के नेतृत्व में थाना छपिया, एसओजी व सर्विलांस सहित पांच टीमें गठित की गईं और जल्द खुलासे के निर्देश दिए। एसपी ने बताया कि हत्या के आरोप में सचिन, बृजेश कुमार व महाजन गुप्ता निवासी सिसई रानीपुर थाना छपिया को मंगलवार को ग्राम सिसईरानीपुर की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित नहर पुलिया के पास से गिरफ्तार किया गया है। उनके निशानदेही से घटना में प्रयुक्त बाइक व आलाकत्ल बांका बरामद किया गया।
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पूछताछ में सचिन ने बताया कि वह पवन ब्रिक्स फील्ड सबरापुर में ट्रैक्टर चालक है। भट्ठे के मुनीम रामसजीवन वर्मा बार-बार अपमानित करते थे और नौकरी से निकालने की धमकी देते थे जिससे वह परेशान था। लगभग आठ-दस दिन पूर्व भट्ठा मालिक ने जमीन बेचकर लगभग 11 लाख रुपये मुनीम को दिए थे। रुपये मुनीम ने ऑफिस में रखा था। इसकी जानकारी होने व बार-बार अपमान के कारण उसने अपने साथी बृजेश एवं गांव के ही महाजन गुप्ता के साथ मिलकर रामसजीवन को रास्ते से हटाने तथा रुपये हथियाने की योजना बनाई।
घटना वाले दिन तीनों बभनान गए और एक लोहे का बांका खरीदा। देर रात लगभग 11 बजे महाजन की मोटरसाइकिल से भट्ठे के पीछे वाले रास्ते से पहुंचे और झाड़ियों में मोटरसाइकिल छिपाकर ऑफिस के बरामदे तक पैदल गए। आरोपी ने बताया कि उसे पहले से मालूम था कि मुनीम किस तख्त पर सोता है, योजना के अनुसार उसने रामसजीवन के दोनों हाथ दबा लिए। बृजेश ने पैर पकड़े और महाजन गुप्ता ने ताबड़तोड़ बांका से सिर, चेहरे व गर्दन पर वार किए। जिससे मुनीम तख्त से गिर गया। मुनीम ने शोर मचाने का प्रयास किया तो वह तीनों घबरा गए और बिना कोई रुपये या सामान लिए हड़बड़ी में पीछे की बाउंड्री फांदकर भाग निकले। आगे जाकर नहर पटरी की सूखी झाड़ियों में बांका को छिपा दिया।