गोमती में गिर रहे नालों के पानी का ट्रीटमेंट होगा नई तकनीक से
लखनऊ। गोमती नदी में सीधे गिरने वाले नालों के पानी को अब एसटीपी के बजाय फाइटोरेमिडिएशन विधि से शोधित किया जा सकेेगा। दिल्ली में इस विधि से नालों का पानी शोधित किया जा रहा है। इसे लेकर बुधवार को नगर आयुक्त अजय द्विवेदी, प्रभारी स्वच्छता सर्वेक्षण डॉ. अरविंद राव, मुख्य अभियंता महेश वर्मा, जोनल अभियंता मनीष अवस्थी और पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण आदि ने दिल्ली के हौज बायोडायवर्सिटी पार्क का दौरा कर तकनीक की जानकारी ली।
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि फाइटोरेमिडिएशन विधि से दिल्ली के हौज डायवर्सिटी पार्क में प्रदूषित जल का शोधन किया जाता है। इसके बाद इस पानी को नीला हौज झील में प्रवाहित किया जाता है। इस तकनीक के संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर सीआर बाबू ने बताया कि प्रदूषित जल को सेडीमेंटेशन टैंक के माध्यम से स्क्रीन/मैश एवं स्टोन/बोल्डर्स की दीवार बनाकर विशेष प्रकार के पौधों के मध्य से गुजारा जाता है। इससे प्रदूषित जल का प्रदूषण स्तर वॉटरबाडीज के लिए आवश्यक मानकों के अनुरूप हो जाता है। इस अवसर पर दिल्ली विवि के वैज्ञानिक डॉ. शाह हुसैन भी मौजूद थे। इस तकनीक का प्रयोग किए जाने से गोमती नदी में गिर रहे 12 मुख्य नालों का शोधन किया जा सकेगा। नगर आयुक्त और उनकी टीम स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल होने गई है।