गोमती नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसके घाटों को संवारने के लिए अरबों
रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसकी हालत जस की तस बनी हुई है।
दरअसल गोमा व उसके तटों की साफ-सफाई कुबेर का खजाना बन चुकी है। पानी की तरह पैसा बहाने के बाद एक बार फिर 30 करोड़ रुपये शासन ने पास कर दिए है।
डेढ़ साल पहले तक तट विकास योजना का यह बजट करीब 300 करोड़ रुपये का था। इसके अलावा गत वर्षों में प्रोजेक्ट गोमा के तहत तीन घाटों के लिए प्राधिकरण 230 करोड़ रुपये प्रस्ताव बना चुका है।
इसमें से 100 कुड़िया घाट पर खर्च किए गए, शेष अन्य कामों पर। बाव जूद इसके कुड़ियाघाट बदहाल है। इतना पैसा खर्च करने के बावजूद डवलपमेंट न हो सका।
ऐसे में जानकार मानते हैं कि 1.7 किलोमीटर गोमती तट के विकास का भविष्य 30 करोड़ रुपये से तो संवरने से रहा। नालों से नदी को बचाने के लिए नगर निगम व जल निगम 425 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं।
साल 2000 में जब प्रदेश के आवास एवं नगर विकास मंत्री वर्तमान सांसद लालजी टंडन थे, तब एलडीए ने तीन घाटों के सुंदरीकरण की योजना बनाई थी।
इसमें कला कोठी, कुड़िया और पक्कापुल घाट को संवारा जाना था, लेकिन सिर्फ कुड़िया घाट को विकसित किया गया। कला कोठी और पक्का पुल घाट इससे अछूता रह गया।
यह स्थान नगर निगम को हैंडओवर है। ऐसे में यहां एक माली की ड्यूटी लगाई गई। ऐसे में करोड़ों रुपये लगाए जाने के बावजूद इस स्थान का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। पूरा घाट गंदगी से पटा हुआ है।