स्कीम के तहत बैंक में जमा सोने के बदले ग्राहक के खाते में उतनी ही मात्रा की गोल्ड यूनिट दर्ज की जाएंगी। उदाहरण के लिए अगर सराफ 10 लाख रुपये के पुराने गहने गलाकर बैंक में जमा कराता है तो ग्राहक के खाते में बराबर की गोल्ड यूनिट आ जाएंगी। बैंक इसी जमा सोने के आधार पर कारोबारियों को सोना उपलब्ध कराएंगे। सराफा संगठनों का कहना है कि अगर यह सोना करीब 4.5 प्रतिशत की लागत पर उपलब्ध कराया जाए तो बाजार में सोने की कमी दूर हो जाएगी।
तय सीमा में सोना रखने पर परेशानी नहीं: सराफा कारोबारियों के मुताबिक कई लोग आयकर नोटिस के डर से सोना सामने नहीं लाते हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना रख सकता है। अगर ग्राहक तय सीमा के भीतर सोना अपने पास रखें तो परेशानी नहीं होगी।