34 दिन बाद आम आदमी के कदम डौंडिया खेड़ा के राव राम बक्स सिंह के किले में पड़े हैं।
17 अक्टूबर से 19 नवंबर तक किला परिसर से काफी दूर लोगों को रोक दिया जा रहा था।
एएसआई और पीएसी के जाने के बाद लोगों के किला परिसर में जाने पर लगे प्रतिबंध को भी खत्म कर दिया गया।
बुधवार सुबह करीब 11.30 बजे एएसआई की टीम ने खुदाई कर रहे मजदूरों को मजदूरी का भुगतान किया।
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इसके बाद टीम के सदस्य डौंडियाखेड़ा से रवाना हो गए। टीम के सदस्यों के जाने के साथ ही पीएसी के जवान भी लौट गए।
अब किला परिसर की हिफाजत के लिए 20 सिपाही और तीन सब इंस्पेक्टर लगाए गए हैं।
बुधवार को दोपहर बाद सुरक्षा कम होने के बाद लोगों ने डरते हुए किला परिसर का रुख किया। पुलिसकर्मियों की टोका-टोकी नहीं हुई तो लोग किला परिसर में जाने लगे।
इसकी जानकारी डौंडिया खेड़ा और आसपास के लोगों को मिली तो अन्य स्थानों के लोग भी किला परिसर पहुंचे। कुछ जमीन के नीचे मिली कंक्रीट की चट्टान के टुकड़े भी अपने साथ ले गए।
घेरा बनाकर रखते थे सामान
किला परिसर की खुदाई में निकलने वाले सामाना को रखने के लिए एएसआई की टीम ने घेरा बनाया था।
अलग-अलग तरह के सामानों को अलग-अलग घेरे में रखा जाता था। शाम को इन सामानों को संरक्षित कर दिया जाता था। एएसआई की टीम ने इस घेरे को जस का तस छोड़ दिया है।
काली पन्नी डालकर ऊपर से भरी मिट्टी
खुदाई वाले दोनों ब्लाकों में मिट्टी भरने से पहले उनमें काली पन्नी डाली गई है। इस पन्नी के ऊपर मिट्टी डाली गई है।
जानकारों का कहना है प्लास्टिक की पन्नी की मौजूदगी से बाद में भी संबंधित लेयर तक निर्बाध खुदाई की जा सकेगी।
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