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लौटा शादी का मौसम, जानिए कब शुरू होगी शहालग

Sun, 10 Nov 2013 02:39 PM IST
आशुतोष मिश्रा/लखनऊ
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पौने चार महीने से निद्रामग्न देवता 13 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी कार्तिंक शुक्ल पक्ष एकादशी से जागने जा रहे हैं।
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इसी के साथ 19 जुलाई से रुके विवाह आदि शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। फिल्मी गीतों पर नाचते-गाते बाराती शहर की सड़कों पर धमाल मचाएंगे तो देर रात तक गली मोहल्लों में शादियों की धूम रहेगी।

ज्योतिषियों के मुताबिक देवोत्थानी एकादशी के बाद से नवंबर और दिसंबर में लग्नों की भरमार के चलते जाड़ों में खूब शहनाइयां बजेगी।

आचार्य प्रदीप ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से देव सो रहे थे। 13 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी से देवता जागेंगे।

तुला की संक्रांति न होने और विवाह लायक नक्षत्र न होने से वैवाहिक लग्न 18 नवंबर से मिलेगी।16 दिसंबर के बाद धनु राशि पर सूर्य के जाने से खरमास शुरू हो जाएगा और शादियां थम जाएगी।
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उसके बाद 18 जनवरी से शादियां शुरू हो जाएंगी।

11/12/13 का अजब-गजब संयोग
सहालग शुरू होने के बाद दिसंबर में 11 दिसंबर को शादी का अजब संयोग है। 12वें महीने की 11 तारीख को होने वाले इस लग्न का अंकीय गणित कुछ इस कदर बन रहा है कि लोगों की मैरिज डेट एक क्रम में 11/12/13 बन रही है।
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यूं जगाएं नारायण को
देवोत्थानी एकादशी के दिन सूर्योदय के बाद भगवान नारायण का पूजन कर उन्हें सफेद मिष्ठान्न अर्पित करने चाहिए। शाम को सूर्यास्त के बाद आंगन में ऐपण बनाकर नवरस से युक्त मौसमी फलों (ईख, सिंघाड़ा, शकरकंद) का भोग लगाना चाहिए।

रात्रि में कीर्तन करना चाहिए। इसके अलावा लोक रीति से भी पूजन कर भगवान नारायण को जगाना चाहिए।
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